प्रेम विवाहिताओ को एसआईआर मे नहीं मिल रहा उनके मायके का साथ।

         मनोज वाल्मीकि ।

मात-पिता व भाई बहन के स्वाभिमान, सम्मान और पवित्र रिश्ते नातो को ठोकर मार कर हमेशा हमेशा के लिए प्रेमियों संघ प्रेम विवाह कर अपनी दुनिया बसा लेने वाली युवतियों महिलाओं के लिए एसआईआर का सर्वे होने से एक बार फिर उनके सामने बड़ी समस्या आ खड़ी हुई है। परिवार रिश्तेदार समाज के लोग सर्वे में प्रेम विवाहिताओ का सहयोग करने से स्पष्ट इनकार कर रहे हैं। प्रेम विवाहिताओ के वोटो को लेकर बीएलओ की सांसे भी अटक रही है और उन्हें इस समस्या के भंवर से पार होने की कोई उम्मीद की किरण भी उन्हें नजर नहीं आ रही है, और ना ही कोई रास्ता दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से लव जेहादियो के जाल में फंसकर शादी कर लेने वाली यूवती और महिलाओं के लिए तो वास्तव में कभी ना सुलझने वाली जटिल समस्या सामने आ खड़ी हुई है। जबकि वोटर आईडी हर किसी के लिए बनवाना अनिवार्य है, जो भारतीय नागरिकता का एक मात्र प्रमाण है। यदि यह वोटर आईडी नहीं बन पाई तो उसे तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। यानी प्रदेश सरकार के निर्देश पर सभी जिला मुख्यालय पर बनाए गए डीटेंशन केद्रो मैं कैदी बन कर तब तक रहना पड़ेगा जब तक उसकी शिनाख्त ना हो जाऐ कि वे भारतीय है या नही।
राष्ट्रीय चुनाव आयोग के एसआईआर के कड़े फरमान से जहां देश प्रदेश और क्षेत्र का आम मतदाता 2003 की वोटर सूची में नाम आने को लेकर दहशत में है पुरुष और महिलाऐ बीएलओ से अपना फार्म भरवाने में जन्मतिथि, आधार संख्या, मोबाइल नंबर, माता पिता अभिभावक की ईपीआईसी संख्या (आदि उपलब्ध) का डाटा भर कर जमा कर रहे हैं और हाथो हाथ ऑनलाइन कर रहे हैं ताकि उनका वोटर आईडी बन सके। हालांकि बीएलओ चुनाव आयोग के दिशा निर्देशो का पालन करते हुए एक-एक मतदाता के घर जाकर उनका फॉर्म भर ऑनलाइन कर रहे हैं। फिर भी न जाने क्यों आम मतदाता परेशान हो रहा है जबकि परेशानी का कोई भी कारण नहीं है। हां परेशानी का सबब उनको है जो मुस्लिम यूवक दिल्ली, महाराष्ट्र, गोवा, अहमदाबाद, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा बिहार लखनऊ बरेली आदि स्थानों पर नौकरी या मजदूरी करने जाते हैं उनमें से अधिकतर लव जिहाद का चोला ओढे रहते हैं, और वह अपने हाथों में कलावा बांधकर पहले उनकी दुकानो और प्रतिष्ठानों पर नौकरी करते हैं फिर बाद में लव जिहाद का खेल खेलना शुरू करते हुऐ आहिस्ता आहिस्ता हिंदू परिवारों की पढ़ी-लिखी युवतियो व महिलाओं को अपने आपको हिंदू होने को गुमराह करके अपने प्रेम जाल में फंसा लेने और हसीन सपने दिखा कर उसे शादी करने के लिए विवश कर अपने साथ भगा कर अपने घर ले आते हैं। ऐसा नहीं है के हिंदू परिवारों के नौजवान भी अपने समुदाय के अलावा मुस्लिम परिवारों की युवतियो को अपने प्रेम जाल में फंसा कर भाग ले जाते हैं और उससे शादी रचा लेते है। इन्हीं प्रेम विवाह रचाने वाले विवाहिताओ के लिए एसआईआर फॉर्म भरने के लिए उनके माता पिता अभिभावक को का ईपीआईसी की समस्याएं जटिल बनी हुई है अब वह अपने माता-पिता की ईपीआईसी किससे ले किससे ना ले उनके माता-पिता तो कोई सा भी कागजात उन्हें देने को तैयार नहीं है बल्कि स्पष्ट बोल दिया कि तुम हमारे लिए मरी समान हो हमारा तुम्हारा माता पिता का कोई संबंध नहीं है। अब वह जाए तो कहां जाए अब उनके सामने अपने किए पर पछताने के अलावा कुछ और नहीं बचा है। जबकि वह अपने आपको अपमान का घूंट पी कर जिन मात पिता और भाई बहनों को ठुकराते हुए घर छोड़ कर चली आई थी आज चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर ने उन्हें मात पिता की याद दिल दी है। क्योंकि मात पिता की ईपीआईसी बगैर प्रेम विवाह रचाने वाली विवाहिताओ का एसआईआर यानी की भारत की नागरिकता का मिलने वाला प्रमाण वोटर आईडी बनने वाले नहीं है। जितनी परेशान प्रेम विवाहिताऐ हैं उतने ही बीएलओ भी है क्योंकि चुनाव आयोग और भारत सरकार का यही कहना है कि भारत का कोई भी वोटर आईडी बनने से ना रह जाए। बीएलओ महोदय प्रेम विवाह बंधनों मे बदी विवाहिताओं पर अपने माता-पिता की ईपीआईसी वह अन्य डॉक्यूमेंट लाने का बराबर दबाव बना रहे हैं लेकिन बार-बार कहने पर भी वह मुहैया नहीं करा पा रही हैं। जो बीएलओ और स्वयं प्रेम विवाहिताओ के लिए मुसीबत बनी हुई है जिसका कोई समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। यदि प्रेम विवाहिताओं की इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो फिर उनका क्या होगा।न क्या उन्हें प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालय पर बनाऐ गये डिटेंशन केंद्रो जो एक तरह से जेल का ही प्रारूप है क्या उन्हें वहां जाना व रहना पड़ेगा वह भी जब तक उसकी पहचान ना हो जाए कि यह भारतीय है। यही डिटेंशन केंद्र प्रेम विवाहिता के लिए गले की हड्डी बन गया है।

लेखक
मनोज वाल्मीकि नगीना
96 39 87 1289

🛍️ Today’s Best Deals

(Advertisement)