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रेलवे प्रशासन की मनमानी, बिना विधिक प्रक्रिया अपनाये गरीबों कर रहा बेदखल

पूर्व में भी रेलवे के तानाशाही रवैया के लोग हो चुके हैं शिकार

रेलवे प्रशासन बड़े लोगों को छोड़ झुग्गी झोपड़ी को बना रही है निशाना लोगों में भारी आक्रोश

ब्यूरो चीफ़ सोनभद्र।
दैनिक समाज जागरण

चोपन/ सोनभद्र। नगर में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब स्थानीय रेलवे प्रशासन दर्जनों गुमटी, झुग्गी झोपड़ी में नोटिस चस्पा कर एक सप्ताह में खाली करने फरमान जारी कर दिया। जो वर्षों से छोटे स्तर पर व्यवसाय कर अपनी रोजी रोटी चला रहे थे वहीं मंगलवार की सुबह जेसीबी मशीन लगा कर प्रीतनगर में दर्जनों लोगों की आजिविका पर बुलडोजर चला दिया जिसको लेकर अपना दल एस के जिला महासचिव श्यामाचरण गिरी ने रेल मंत्री को संबोधित पत्र लिखकर तत्काल संज्ञान लेने की गुहार लगाई है उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि चोपन, जिला सोनभद्र, उत्तर प्रदेश का प्रमुख रेल स्टेशन है और पूर्व मध्य रेल का सबसे बड़ा जंक्शन/स्टेशन है। दिनांक 27/01/2025 को स्थानीय रेल प्रशासन द्वारा बगैर विधिक प्रक्रिया अपनायें अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में बसे लोगों को बल पूर्वक खाली कराया जा रहा है, जिसके संबंध बताया गया कि रामलीला मैदान में विगत 40 वर्षों से करीब 20 गांवों के स्थानीय रहवासी/छोटे मझोले किसान अपनी कृषि उपज / सब्जी को शाम के समय तीन से चार घण्टे के लिये बेचने के लिये रामलीला मैदान में दुकान लगाते है, जिससे न तो किसी प्रकार का आवागमन या यातायात बाधित होता है और न ही किसी रेलकर्मी को असुविधा होती है। बल्कि रेलकर्मचारियों को ताजी सब्जी सस्ते दर पर उपलब्ध होती है। सब्जी बेचने के बाद उक्त दुकानदार वापस अपने-अपने घरो को चले जाते है। उनके द्वारा रामलीला मैदान में किसी प्रकार का कोई स्थाई कब्जा का प्रयास नहीं किया गया है। बावजूद इसके रेल प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के उनके सब्जी की अस्थाई दुकानों / ठेला को मय आर०पी०एफ फोर्स बल पूर्वक हटा दिया जिसकी वजह से स्थानीय छोटे व मझोले सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों के सामने भूखमरी का संकट उत्पन्न हो गया है तथा रेलकर्मियों तथा स्थानीय निवासियों को ताजी सब्जियों का संकट है। विशेष तौर से ज्ञात हो कि नगर में हाईवे की पटरियों को छोड़कर कोई ऐसी जगह नहीं है जहाँ किसान अपनी उपज को बेच सके और अगर पटरी पर किसान अपनी उपज / सब्जी को बेचते है तो यातायात बाधित होने के साथ साथ सड़क दुर्घटना की प्रबल सम्भावना है। नगर चोपन में रेल प्रशासन द्वारा अपनी जमीनों का सीमांकन कर बाउण्ड्री का निर्माण कर दिया गया है। बाउण्ड्री के उस पार लोक निर्माण विभाग उत्तर प्रदेश की जमीन व रास्ता है। उक्त सड़क के पटरियों पर छोटे दुकानदार / व्यवसायी अपनी अपनी दुकाने रखकर व्यवसाय कर रहे है तथा अपने-अपने परिवारका जीविकोपार्जन कर रहे है। रेल प्रशासन द्वारा अपने अधिग्रहित जमीन में न होने के बावजूद उक्त दुकानदारों को सात दिन के अन्दर जगह खाली करने का नोटिस दे दिया गया है, जो बिल्कुल अवैध तथा उत्पीड़नात्मक कार्य है। जिसको रोका जाना आवश्यक है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिंह ने मांग किया है कि जहाँ रेल विभाग की सीमा राज्य सरकार या काश्तकारों के जमीनों से लगा हुआ है वहां पर रेल विभाग के अधिकारी, राज्य सरकार के अधिकारियों, कागजात माल में दर्ज काश्तकारों की उपस्थिति अनिवार्य करते हुए संयुक्त सीमांकन कर ही किसी रहवासी के घर मकान को तोड़ा जाय। स्थानीय रेल प्रशासन के अधिकारियों द्वारा रेल विभाग के सीमांत काश्तकारों व अन्य गरीब रहवासियों / दुकानदारों एवं अन्य व्यवसायी प्रतिष्ठानों के मालिको को बगैर उचित विधिक प्रकिया को अपनाये बिना ध्वस्तीकरण की कार्यवाही अमल में लायी जा रही है, जो कानून व मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है। बगैर उचित नापी/पैमाईश के किसी भी रहवासी को उजाड़ा जाना कानून के विपरित है। आगे श्री गिरी ने कहा कि 20 गांव के छोटे व मझोले किसानो की कृषि उपज के विक्रय हेतु तथा सब्जी विक्रेताओं के द्वारा उपयोग में लाये जा रहे रामलीला मैदान को स्थाई तौर पर सब्जी बेचने की अनुमति तथा बगैर भौतिक सत्यापन व कानूनी सीमांकन के किसी भी रहवासी का घर न गिराया जाय ताकि लोगो के साथ न्याय हों।


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