समाज जागरण रंजीत तिवारी
रामेश्वर वाराणसी।।
रामेश्वर में आस्था का प्रतीक रामेश्वर धाम का लोटा-भंटा मेला इस बार 10 नवंबर सोमवार को लगेगा। इसकी तैयारियां तेज हो गई हैं। मान्यता के आधार पर रामेश्वर तीर्थ धाम में भगवान राम ने रावण वध के बाद प्रायश्चित के लिए प्रवास किया था और वरुणा नदी से एक मुठठी रेत लेकर शिवलिंग की स्थापना की थी। शिव व राम का प्रथम मिलन होने के कारण यह रामेश्वर नाम से प्रसिद्ध हुआ।कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व एक युवा दंपती पुत्र व कल्याण की कामना से अगहन मास के कृष्ण पक्ष के छठे दिन रात्रि विश्राम कर प्रभु का स्मरण किया तो पुत्र रत्न की कामना पूर्ण हुई।

इसके बाद से ही लोग पानी के लिए लोटा व खाने के लिए आलू-भंटा लेकर पहुंचने लगे। परिजनों के साथ अहरे पर भोजन तैयार कर भगवान शिव को प्रसाद चढ़ाकर स्वयं ग्रहण कर कामना को लेकर मेला का आनन्द उठाते रहे। इस परंपरा ने आज वृहद रूप ले लिया है।मेले की तैयारी में शनिवार को लगभग तीस सफाई कर्मचारियों ने वरुणा घाट, रामेश्वर महादेव मंदिर परिसर,सभी धर्मशालाओं सहित सड़क के दोनों किनारे सफाई कार्य टीम लीडर शीतला प्रसाद के नेतृत्व में करते नजर आए।खंड विकास अधिकारी सेवापुरी राजेश कुमार सिंह ने बताया मेले में साफ सफाई सहित अन्य व्यवस्था उचित हो इसके लिए तैयारी की जा रही हैं। रविवार को भी सभी सफाई कर्मचारियों मेला परिक्षेत्र में सफाई कार्य को पूरा करेंगे।मेला में क्षेत्र में ध्वनि विस्तारक यत्र, प्रकाश हेतु लाईट,सीसी टीवी कैमरा,वरुणा सेतु पर बैरिकेटिंग सहित अन्य तैयारी जोरो पर किया जा रहा है।



