वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
किशनगंज कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा एवं संवैधानिक अधिकारों से जुड़े एक गंभीर मामले में राष्ट्रीय आरटीआई कार्यकर्ता सह मानवाधिकार कार्यकर्ता मोहम्मद अनसार खां ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत पूर्णिया प्रमंडल के आयुक्त एवं समाज कल्याण विभाग को आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया है। आवेदन में अधिनियम की धारा 7(1) के प्रोविज़ो (लाइफ एंड लिबर्टी क्लॉज) के अंतर्गत 48 घंटे के भीतर सूचना उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
आरटीआई आवेदन उस प्रकरण से संबंधित है, जिसमें महिला सेविकाओं द्वारा अभद्र व्यवहार एवं मानसिक उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इस मामले में एक निर्वाचित विधायक द्वारा भी जिला प्रशासन को लिखित शिकायत दी गई थी। शिकायतों के आलोक में जिला पदाधिकारी, किशनगंज द्वारा आदेश संख्या 138 दिनांक 06 फरवरी 2026 के माध्यम से प्रभारी सीडीपीओ को अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया था।
आरटीआई आवेदन में यह गंभीर प्रश्न उठाया गया है कि उक्त शिकायतों के बावजूद कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम (POSH Act), 2013 के तहत अनिवार्य आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) द्वारा अब तक कोई वैधानिक जांच क्यों नहीं कराई गई। इसके साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि बिना जांच पूर्ण किए ही संबंधित पदाधिकारी को पुनः उसी स्थान का प्रभार सौंप दिया गया, जिससे शिकायतकर्ता महिला सेविकाओं के बीच भय, मानसिक दबाव एवं असुरक्षित कार्य-पर्यावरण की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
आवेदन में इस पूरी प्रक्रिया को भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 15(3) (महिलाओं के संरक्षण का राज्य का विशेष दायित्व) तथा अनुच्छेद 21 (गरिमा, मानसिक शांति एवं सुरक्षित कार्य-पर्यावरण के साथ जीवन का अधिकार) के संभावित उल्लंघन के रूप में रेखांकित किया गया है। साथ ही POSH अधिनियम, 2013 की धारा 12, जो शिकायत के पश्चात प्रतिशोध से संरक्षण प्रदान करती है, के उल्लंघन की भी आशंका जताई गई है।
मोहम्मद अनसार खां ने कहा कि शिकायत के बाद संबंधित अधिकारी को पुनः उसी स्थान पर पदस्थापित किया जाना महिला सेविकाओं के लिए मानसिक प्रताड़ना, भय एवं असुरक्षा की भावना को बढ़ाता है, जो कानून की मंशा के विपरीत है। उन्होंने बताया कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर राज्य महिला आयोग एवं मानवाधिकार आयोग के समक्ष विधिसम्मत शिकायत प्रस्तुत की जाएगी, ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा एवं संवैधानिक अधिकारों की प्रभावी रक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि कानून के शासन, महिला सम्मान, संवैधानिक मूल्यों एवं मानवाधिकारों के संरक्षण के उद्देश्य से किया गया एक संवैधानिक प्रयास है।



