आस्था सकारात्मक तत्व है-आचार्या श्रुति सेतिया
गाजियाबाद,वीरवार, 12-03-2026 को केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में आस्था और अन्धविश्वास विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।य़ह कोरोना काल से 772 वाँ वेबिनार था।
वैदिक विदुषी श्रुति सेतिया ने कहा कि आज के समय में आस्था और अंधविश्वास के बीच का अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है। आस्था मनुष्य के जीवन का एक सकारात्मक ओर प्रेरणादायक तत्व है,जो उसे नैतिकता,धैर्य ओर आत्मबल प्रदान करती है।आस्था का आधार अनुभव,विश्वास और सकारात्मक जीवन मूल्य पर टिका होता है।उसके विपरीत अंधविश्वास वह स्थिति है जब मनुष्य बिना तर्क, बिना प्रमाण ओर बिना समझ के किसी बात को सत्य मान लेता है। अंधविश्वास अक्सर भय,अज्ञान और परम्पराओं की गलत व्याख्या से जन्म लेता है।यह व्यक्ति की स्वतंत्र सोच और विवेक को कमजोर करता है।
आस्था मनुष्य को शक्ति देती है जबकि अंधविश्वास उसे कमजोर ओर निर्भर बनाता है।यदि आस्था विवेक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जुड़ी हो तो वह समाज के लिए प्रेरणादाई बनती है,लेकिन जब वही आस्था विवेक से दूर हो जाती है, तब वह अंधविश्वास का रूप ले लेती है।उदाहरण के रूप में किसी कठिन समय में ईश्वर या प्रकृति पर विश्वास रखकर धैर्य और साहस बनाए रखना आस्था है,लेकिन बीमार होने पर इलाज कराने के बजाय केवल टोना टोटका पर निर्भर रहना अंधविश्वास है।परीक्षा से पहले आत्मविश्वास और परिश्रम के साथ प्रार्थना करना आस्था है,लेकिन बिना पढ़े केवल किसी ताबीज या उपाय के सफलता की उम्मीद करना अंधविश्वास है।समाज में जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देकर स्वस्थ आस्था को मजबूत करना तथा अंधविश्वास से बचना आज की आवश्यकता है।
मुख्य अतिथि कृष्णा पाहुजा व अध्यक्ष अनिता रेलन ने भी अपने विचार व्यक्त किए परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया व प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
गायिका कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा, रविन्द्र गुप्ता, कमला हंस, संतोष धर, कुसुम भण्डारी आदि के मधुर भजन हुए।



