सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी में होटल मौर्या में आज शामिल होंगे संजीव मिश्रा

‘सन ऑफ मिथिला’ संजीव मिश्रा का वीआईपी में शामिल होना: महागठबंधन को कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल में मिलेगी नई ताकत

सदस्यता ग्रहण को लेकर पोस्टर से पटा राजधानी पटना का गलियारा

संजीव मिश्रा की राजनीतिक एंट्री महागठबंधन के चुनावी समीकरण को करेगी मजबूत

पटना/डा. रूद्र किंकर वर्मा ।

बिहार की राजनीति में शनिवार को एक बड़ा घटनाक्रम होने जा रहा है। समाजसेवी संजीव मिश्रा, जिन्हें ‘सन ऑफ मिथिला’ के नाम से जाना जाता है, आज विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) में शामिल होंगे। यह ऐतिहासिक घटना पटना के होटल मौर्या में आयोजित एक विशेष मिलन समारोह में होगी, जिसमें वीआईपी के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की उपस्थिति में संजीव मिश्रा पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर राजधानी पटना के विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पोस्टरों से यह स्पष्ट है कि यह कदम बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।

संजीव मिश्रा की समाज में गहरी पैठ और व्यापक लोकप्रियता को देखते हुए उनका वीआईपी में शामिल होना महागठबंधन के लिए एक बड़ी राजनीतिक रणनीति बन सकता है। विशेषकर कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल क्षेत्रों में, जहां उनकी पहचान और समर्थन बेहद मजबूत है, इस कदम से महागठबंधन को चुनावी लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। इन क्षेत्रों में संजीव मिश्रा के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, यह कदम महागठबंधन के चुनावी समीकरण को मजबूत कर सकता है।

*संजीव मिश्रा का समाजसेवा में अभूतपूर्व योगदान और राजनीतिक प्रभाव*

संजीव मिश्रा पनोरमा ग्रुप के संस्थापक और अध्यक्ष हैं, और वे रियल एस्टेट, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज सेवा के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उनका कार्यक्षेत्र केवल एक समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विभिन्न जातियों और समुदायों के बीच सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा देते हैं। इस कारण, उनका नेतृत्व समाज में एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है। यही वजह है कि वे बिहार के विभिन्न जाति और समुदायों में व्यापक रूप से सम्मानित हैं और उनकी लोकप्रियता में लगातार वृद्धि हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संजीव मिश्रा का चुनावी प्रभाव उनके समाजसेवी कार्यों और समुदाय में गहरे जुड़ाव के कारण और भी मजबूत हुआ है। अधिकांश नेता पार्टी नेतृत्व से उम्मीदवारी के लिए आग्रह करते हैं, लेकिन संजीव मिश्रा के मामले में यह स्थिति पूरी तरह उलट है। उनका प्रभाव इतना गहरा है कि उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों से खुद से उम्मीदवार बनने के लिए आमंत्रण मिल रहा है। यह उनके बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और समाज में उनकी स्वीकार्यता का प्रमाण है।

*महागठबंधन के लिए एक रणनीतिक लाभ*

संजीव मिश्रा का वीआईपी में शामिल होना महागठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम साबित हो सकता है। खासकर कोसी और सीमांचल जैसे क्षेत्रों में, जहां उनका समाजसेवी कार्य और लोकप्रियता पहले से ही मजबूत है, इस कदम से महागठबंधन को चुनावी लाभ मिल सकता है। उनके पार्टी में शामिल होने से ब्राह्मण समाज सहित अन्य समुदायों का समर्थन मिल सकता है, जिससे महागठबंधन के वोट बैंक में इज़ाफा हो सकता है। इसके अलावा, संजीव मिश्रा के नेतृत्व से महागठबंधन को एक नया चेहरा मिल सकता है, जो चुनावी मैदान में महागठबंधन को मजबूती दे सकता है।

*संजीव मिश्रा का अंतरराष्ट्रीय सम्मान और राजनीति में कदम*

संजीव मिश्रा को हाल ही में नेपाल में उनके समाजसेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है, जिससे उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान भी बढ़ी है। पनोरमा स्पोर्ट्स सीजन 7 के समापन समारोह में वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने उनकी सराहना की और उन्हें अपनी पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। अब संजीव मिश्रा का राजनीति में कदम महागठबंधन को एक नई दिशा और ताकत दे सकता है।

संजीव मिश्रा का वीआईपी में शामिल होना न केवल उनकी व्यक्तिगत राजनीति के लिए बल्कि वीआईपी पार्टी के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उनकी समाज में गहरी पैठ और सम्मान का लाभ पार्टी को कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में मिल सकता है। यह महागठबंधन के लिए एक जीत साबित हो सकता है, जो तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने के अभियान को भी मजबूती दे सकता है। संजीव मिश्रा के राजनीतिक कदम से महागठबंधन के चुनावी समीकरण में बदलाव और एक नई ऊर्जा का संचार हो सकता है।