सरदार पटेल जयंती पर सोनभद्र बार सभागार में सजी काव्य संध्या, ओज, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों से सराबोर रही महफिल
समाज जागरण/ब्यूरो चीफ विजय कुमार अग्रहरी
सोनभद्र। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर शनिवार को शहीद स्थल करारी एवं सोनभद्र बार एसोसिएशन के साहित्य प्रकोष्ठ के संयुक्त संयोजन में बार सभागार, कचहरी में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। काव्य संध्या में कवियों ने राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सरोकारों और हास्य-व्यंग्य से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी महफिल में देशप्रेम, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय एकता की गूंज सुनाई दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ईश्वर विरागी ने की। शुभारंभ दिवाकर द्विवेदी मेघ, अजय चतुर्वेदी कक्का, बार एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव एडवोकेट एवं महामंत्री योगेश कुमार द्विवेदी ने मां सरस्वती और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।
‘फिर से हमें पटेल चाहिए’ रचना ने भरा राष्ट्रभक्ति का जोश
आयोजक प्रद्युम्न त्रिपाठी ने वाणी वंदना के साथ काव्य संध्या का आगाज किया। उन्होंने अपनी चर्चित पंक्तियां ‘फिर से हमें पटेल चाहिए, आतंकियों पर नकेल चाहिए, राष्ट्र अखंडता रहे सुरक्षित, अपराधियों को जेल चाहिए’ सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया। उनकी रचना पर खूब तालियां बजीं।
ओज और श्रृंगार की कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने प्रेम और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित रचना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि जीवन में वही व्यक्ति सफल है, जिसके मन में प्रेम का भाव हो। उनकी प्रस्तुति ने कबीर के ढाई आखर प्रेम के संदेश को जीवंत कर दिया।
राष्ट्रवाद के सजग प्रहरी धर्मेश चौहान एडवोकेट ने ‘देश से कुछ भी बड़ा नहीं इंसान के लिए, तन-मन हमारा अर्पित हिंदुस्तान के लिए’ जैसी पंक्तियों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। वहीं प्रभात सिंह चंदेल ने महंगाई और चीन की घुसपैठ जैसे समसामयिक मुद्दों पर व्यंग्यात्मक रचना सुनाकर व्यवस्था पर सवाल उठाए।
हास्य-व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों पर भी हुई काव्य वर्षा
कार्यक्रम का संचालन कर रहे अशोक तिवारी ने अपनी शायरी से श्रोताओं को भावुक किया। दिवाकर द्विवेदी मेघ ने सामाजिक विसंगतियों पर आधारित रचना प्रस्तुत की। गीतकार दिलीप सिंह दीपक ने ‘आंधियों का है समय, तूफान थमना शेष है, है घनेरा तम मगर सूरज निकलना शेष है’ सुनाकर आम आदमी की पीड़ा और उम्मीदों को स्वर दिया।
विवेक चतुर्वेदी ने गजल, कतआ और नज्म प्रस्तुत की, जबकि मदन चौबे एडवोकेट ने मुक्तछंद के माध्यम से सामाजिक विषयों को उठाया। शिक्षक विनोद कुमार सिंह ने नवगीत के जरिए प्रेम और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति की। दयानंद दयालू ने दहेज प्रथा पर व्यंग्य करते हुए सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया। सुधाकर स्वदेशप्रेम ने तिरंगे और राष्ट्रभक्ति से जुड़ी रचना सुनाकर माहौल को भावुक बना दिया।
गायक सुशील मिश्रा ने सरदार पटेल को समर्पित गीत ‘धनि-धनि पटेल जी भारत के ललनवां, जय-जय हिंदुस्तान गूंजै जगमग गगनवां’ सस्वर प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी। वहीं राकेश शरण मिश्र एडवोकेट ने देश के प्रथम गृह मंत्री सरदार पटेल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को समर्पित समसामयिक रचना प्रस्तुत कर उन्हें नमन किया।
राजनीति पर व्यंग्य सुनाकर अजय चतुर्वेदी कक्का ने बटोरी वाहवाही
वरिष्ठ हास्य-व्यंग्य कवि अजय चतुर्वेदी कक्का ने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए अपनी रचना ‘खूब फुटानी छांट रही है, राजनीति हमें बांट रही है’ सुनाई। उनकी व्यंग्यात्मक प्रस्तुति पर सभागार ठहाकों और तालियों से गूंज उठा। प्रेमी बौद्ध ने भी अपनी काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं।
अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि ईश्वर विरागी ने ‘थाम लेंगे वक्त को चलने न देंगे, ऐ हिंद हम तुझको कभी झुकने न देंगे’ जैसी ओजपूर्ण पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं पर अमिट छाप छोड़ी।
कार्यक्रम के समापन पर ऋषभ त्रिपाठी ने सभी कवियों, अतिथियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संदीप कुमार शुक्ल, जयशंकर त्रिपाठी, देवानंद पांडेय, गोपाल बंगाली, त्रिपुरारी मिश्रा, प्रदीप कुमार सिंह, ठाकुर कुशवाहा, फारुख अली हाश्मी, गुलाम हुसैन, हर्ष चौहान, राधा प्रसाद चौहान और अजीत शुक्ल सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं अधिवक्ता देर शाम तक उपस्थित रहे।
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