किशनगंज की सड़कों पर ‘काल’ बनी रफ्तार, हादसों से दहशत में लोग

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
जिले में सड़क हादसे अब महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक भयावह सिलसिला बनते जा रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों में नेशनल हाईवे से लेकर ग्रामीण सड़कों तक लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने आम लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। आए दिन हो रही मौतों ने सड़क सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है।


आंकड़ों पर नजर डालें तो तेज रफ्तार, लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी इन हादसों की मुख्य वजह बनकर सामने आई है। हाल के दिनों में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में हुए हादसों में कई युवाओं की जान चली गई, जिससे कई परिवारों के घरों के चिराग बुझ गए हैं।


बढ़ती घटनाओं के बीच अब जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सड़कों की सुरक्षा सुनिश्चित करना परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की संयुक्त जिम्मेदारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई नाकाफी नजर आ रही है। ओवरलोडिंग पर नियंत्रण नहीं होना और बिना हेलमेट या ट्रिपलिंग करने वालों के खिलाफ महज औपचारिक कार्रवाई ने हालात को और बिगाड़ दिया है।
इसके अलावा, एनएचएआई और स्थानीय पथ निर्माण विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जिले के कई प्रमुख मार्गों पर अब भी साइन बोर्ड, स्ट्रीट लाइट और डिवाइडर का अभाव है, जबकि अवैध कट हादसों को सीधा निमंत्रण दे रहे हैं।


स्थिति को सुधारने के लिए प्रशासन को दुर्घटना संभावित ‘ब्लैक स्पॉट्स’ की पहचान कर तत्काल सुधार कार्य शुरू करना होगा। साथ ही ड्रंक एंड ड्राइविंग के खिलाफ विशेष अभियान चलाने और ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सख्ती बरतने की जरूरत है।


हालांकि, केवल प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। सड़क पर नियमों की सबसे अधिक अनदेखी खुद वाहन चालकों द्वारा की जाती है। किशोरों के हाथों में तेज रफ्तार बाइक, बिना हेलमेट स्टंट और जल्दी पहुंचने की होड़, इन हादसों को और बढ़ावा दे रही है।


अब समय आ गया है कि प्रशासन सख्त कदम उठाए और आम नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी समझें। तभी किशनगंज की सड़कें सुरक्षित सफर का माध्यम बन सकेंगी, न कि मौत का रास्ता।

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