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बाल विवाह के खिलाफ छात्र-छात्राओं ने निकाली जागरूकता रैली, दिया बाल विवाह मुक्त समाज का संदेश

समाज जागरण/ जिला ब्यूरो प्रमुख

सोनभद्र। बाल विवाह के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बुधवार को हंस वाहिनी इंटर कॉलेज कसया कला से पंचायत भवन तकिया तक जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के दौरान छात्र-छात्राओं ने “क्यों दी बच्चों को सजा, बाल विवाह से लो बचा” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया।


महिला कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी के निर्देशन और जिला प्रोबेशन अधिकारी के नेतृत्व में हब फॉर इंपावरमेंट ऑफ वूमेन, चाइल्ड हेल्पलाइन एवं वन स्टॉप सेंटर की संयुक्त टीम ने जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम के दौरान हब फॉर इंपावरमेंट ऑफ वूमेन की जेंडर एक्सपर्ट सीमा द्विवेदी एवं साधना मिश्रा, मिशन कॉर्डिनेटर नीतू यति, चाइल्ड हेल्पलाइन की केस वर्कर सीमा शर्मा तथा वन स्टॉप सेंटर की सेंटर मैनेजर दीपिका सिंह ने छात्र-छात्राओं और उपस्थित लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसकी रोकथाम के संबंध में जानकारी दी।

टीम ने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। लोगों से अपील की गई कि यदि आसपास कहीं बाल विवाह होने की जानकारी मिले तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बारे में भी जागरूक किया गया। उन्हें बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देते हुए किसी भी तरह की समस्या होने पर संबंधित हेल्पलाइन और विभाग को सूचना देने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं और उपस्थित लोगों को बाल विवाह रोकने तथा समाज में जागरूकता फैलाने की शपथ दिलाई गई। सभी ने बाल विवाह मुक्त समाज बनाने की दिशा में सक्रिय सहयोग करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में प्रधानाचार्य उमाकांत मिश्र, राजेंद्र प्रसाद पांडेय, सुमन, सैलमती, अरुण त्रिपाठी, चंद्रकांत मिश्र, सतीश यादव, कमलेश सिंह और मनोज कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे। निर्धारित 1265 के सापेक्ष कुल 630 छात्र-छात्राओं ने कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। आयोजकों ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग में जागरूकता जरूरी है। छात्र-छात्राओं के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ संदेश को परिवारों और समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।


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