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सूर्या सागर महाराज के समर्थन में मेरठ में विरोध प्रदर्शन का ऐलान, सिख–हिंदू–जैन प्रतिनिधि होंगे शामिल

भगत सिंह दोआबी बोले – संतों के सम्मान पर आघात स्वीकार नहीं, प्रशासन से प्रेस कॉन्फ्रेंस की अनुमति पर जवाब मांगा जाएगा

रिपोर्ट: रवींद्र आर्य
मेरठ/गाज़ियाबाद

पंजाब के सामाजिक कार्यकर्ता भगत सिंह दोआबी (विक्रमजीत सिंह) ने अपने सिख साथियों के साथ गुजरात के जैन मुनि सूर्या सागर महाराज के समर्थन में मेरठ में विरोध दर्ज कराने की घोषणा की है। उनका कहना है कि 24 जुलाई 2026 को मेरठ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ लोगों द्वारा सूर्या सागर महाराज के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए तथा उनके पोस्टर प्रदर्शित कर सार्वजनिक रूप से आलोचना की गई, जिससे उनके समर्थकों में नाराज़गी है।

भगत सिंह दोआबी ने कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल मेरठ प्रशासन से यह जानना चाहेगा कि उक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की अनुमति किन आधारों पर दी गई तथा क्या उसमें लगाए गए आरोपों के तथ्यों का सत्यापन किया गया था। उनका कहना है कि किसी भी सनातनी धर्मगुरु, संत या महात्मा के विरुद्ध सार्वजनिक मंच से आरोप लगाने के मामलों में प्रशासन को निष्पक्षता, संवेदनशीलता और कानून के अनुरूप कार्य करना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि यदि किसी राजनीतिक उद्देश्य से सनातन संतों और गुरुओं का अपमान किया जाता है, तो वह धार्मिक आस्थाओं को ठेस पहुंचाने वाला विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

इस अभियान को डॉ. सीताराम रमन, गुजरात गौरक्षा संघ (हालोल, गुजरात) के प्रमुख हितेश देवड़ा, लक्ष्मण बालयोगी सहित नोएडा से यति महादेवा नन्द गिरी महाराज से अनेक सनातन संतों, साधु-संतों, साध्वियों तथा हिंदू समाज के प्रतिनिधियों का समर्थन प्राप्त होने का दावा किया गया है। समर्थकों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि संतों के सम्मान, धार्मिक आस्था तथा सामाजिक सद्भाव के पक्ष में प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखना है।

भगत सिंह दोआबी के अनुसार, सिख, हिंदू और जैन समाज के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से मेरठ प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उनका मानना है कि बिना पुष्टि के लगाए गए आरोप समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सिख, हिंदू और जैन समाज के बीच वर्षों से भाईचारे, आपसी सम्मान और सामाजिक समरसता की परंपरा रही है तथा इसी भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से यह प्रतिनिधिमंडल कानून के दायरे में रहकर अपना विरोध दर्ज कराएगा।

इस बीच, समर्थकों के अनुसार जैन मुनि सूर्या सागर महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उनके लिए धर्म से पहले राष्ट्र सर्वोपरि है और देश की सेवा ही उनका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा:

“मैं धर्म से पहले अपने देश को मानता हूँ और इसी देश की सेवा मेरे लिए सर्वोपरि है।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व उन्हें आतंकी संगठन अल-कायदा की ओर से आधिकारिक धमकी मिली थी, जिसके संबंध में भारत के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) द्वारा भी जवाब दिया गया था।

सूर्या सागर महाराज ने मुंबई के इवान रेगो (Ivan Rego) का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रप्रेम किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा:

“यह हैं इवान रेगो साहब, मुंबई से। ईसाई होने के बावजूद एक कट्टर हिंदुस्तानी हैं, जिनके लिए राष्ट्र सबसे पहले है। मेरा मानना है कि जो देश से प्रेम करेगा, वही मेरा अपना है।”

राजनीतिक आलोचनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा:

“कुछ राजनीतिक दलों के लोग मेरे खिलाफ चाहे जितनी बयानबाज़ी करें, मैं लोकतांत्रिक तरीके से अपने विचार रखता रहूँगा। राजनीति में अनुभव और जनता का विश्वास ही सबसे बड़ा जवाब होता है। समय आने पर मेरा जवाब तथ्यों, काम और जनसमर्थन से मिलेगा, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।”


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