पटना, 23 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं, जहां विपक्षी महागठबंधन ने आखिरकार अपने सीएम पद के चेहरे के रूप में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव को औपचारिक रूप से घोषित कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला कांग्रेस नेता अशोक गहलोत की मध्यस्थता के बाद लिया गया, जो दिल्ली से पटना पहुंचे और लालू प्रसाद यादव व तेजस्वी से मुलाकात की। गहलोत ने गठबंधन के भीतर उभरी दरारों को भरने का दावा करते हुए कहा, “इंडिया गठबंधन पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ेगा। कोई ‘फ्रेंडली फाइट’ नहीं होगी।”

महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर पिछले कुछ दिनों से तनाव बना हुआ था। आरजेडी ने 143 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कांग्रेस को 61 सीटें मिली हैं। हालांकि, नौ सीटों पर दोनों पार्टियां आमने-सामने आ गई थीं, जिससे गठबंधन की एकता पर सवाल उठे थे। जेएमएम (झारखंड मुक्ति मोर्चा) ने भी गठबंधन से किनारा कर लिया है और छह सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। इसके अलावा, भाकपा (माले) ने 20 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जो सामाजिक न्याय के मुद्दे पर जोर दे रही है।
दूसरी ओर, सत्ताधारी एनडीए मजबूत दिख रहा है। भाजपा और जेडीयू प्रत्येक 101-101 सीटों पर लड़ेगी, जबकि चिराग पासवान की एलजेपी (रा) को 29 सीटें मिली हैं। चिराग पासवान ने कहा, “एनडीए की जीत ऐतिहासिक होगी। महागठबंधन की कलह बिहार की जनता देख रही है।” यूनियन होम मिनिस्टर अमित शाह बिहार के दौरे पर हैं और 24-25 अक्टूबर को सिवान, बक्सर, बिहारशरीफ, मुंगेर व खगड़िया में रैलियां करेंगे।
चुनाव आयोग ने पहले चरण के नामांकन प्रक्रिया को पूरा कर लिया है, जहां 121 सीटों पर 1,314 उम्मीदवार मैदान में हैं। दूसरे चरण के लिए नामांकन की जांच 23 अक्टूबर को हो रही है, जिसमें 122 सीटों पर 2,600 से अधिक दावेदार हैं। वोटिंग 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में होगी, जबकि नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के तहत 68.5 लाख वोटरों के नाम हटाए गए, जबकि 21.5 लाख नए जोड़े गए हैं।
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने भी मैदान संभाला है, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा के दबाव में उनके तीन उम्मीदवारों (दनापुर, ब्रह्मपुर व गोपालगंज) ने नाम वापस ले लिया। किशोर ने चुनाव आयोग से उम्मीदवारों की सुरक्षा की मांग की है।
चुनाव के मुख्य मुद्दे रोजगार, पलायन, महिला सुरक्षा, शिक्षा व विकास हैं। एनडीए विकास का दावा कर रहा है, जबकि महागठबंधन सामाजिक न्याय व बेरोजगारी पर फोकस कर रहा है। एआईएमआईएम ने भी सीमांचल व मिथिलांचल में 25 उम्मीदवार उतारे हैं, जो मुस्लिम वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।
बिहार की जनता की नजर 14 नवंबर पर टिकी है, जहां नतीजे न केवल राज्य की सियासत बदल सकते हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी संदेश देंगे। क्या नीतीश कुमार की अगुवाई वाला एनडीए सत्ता बरकरार रखेगा या तेजस्वी यादव लौटेंगे सत्ता में? आने वाले दिन बताएंगे।



