वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
किशनगंज नगर परिषद क्षेत्र में जाम अब महज यातायात की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह आम लोगों की दिनचर्या का दर्द बन चुका है। पश्चिम पाली, चूड़ी पट्टी, डे मार्केट, गुदरी बाजार समेत शहर के अधिकांश प्रमुख मार्गों पर दिनभर जाम लगा रहता है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पैदल चलना भी चुनौती बन गया है और वाहन चलाना तो मानो जोखिम उठाने जैसा हो गया है।
शहर की मुख्य सड़कों को बेधड़क सब्जी मंडी और दुकानों में तब्दील कर दिया गया है। अतिक्रमण खुलेआम हो रहा है, लेकिन नगर परिषद और प्रशासन मूकदर्शक बने हुए हैं। बड़े-बड़े मॉल और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बिना पार्किंग व्यवस्था के संचालित हो रहे हैं, जिससे ग्राहक मजबूरी में सड़कों को ही पार्किंग बना रहे हैं। वहीं स्थानीय दुकानदारों ने भी सड़क पर कब्जा जमाकर यातायात व्यवस्था की रीढ़ तोड़ दी है।
टोटो की बेतहाशा बढ़ती संख्या ने शहर की सड़कों पर आग में घी डालने का काम किया है। जैसे ही कोई बड़ा वाहन मुख्य सड़क में प्रवेश करता है, पूरा इलाका थम सा जाता है। घंटों जाम में फंसे लोग प्रशासनिक उदासीनता को कोसते नजर आते हैं। स्कूल जाते बच्चे हों या दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, मरीज हों या बुजुर्ग—हर कोई इस अव्यवस्था की मार झेल रहा है।
नगर परिषद का अतिक्रमण हटाओ अभियान अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है। अभियान के नाम पर कुछ देर के लिए सड़कें खाली कराई जाती हैं और अगले ही दिन अतिक्रमण पहले से ज्यादा मजबूती के साथ लौट आता है। यह स्थिति न केवल प्रशासन की नाकामी को उजागर करती है, बल्कि उसकी इच्छाशक्ति पर भी सवाल खड़े करती है।
इन्हीं जामग्रस्त सड़कों से होकर कोर्ट, टाउन थाना, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, स्कूल, गैस गोदाम, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपात सेवाएं गुजरती हैं। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि यदि किसी आपात स्थिति में एंबुलेंस या दमकल वाहन जाम में फंस जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
जाम में फंसे लोगों का सब्र अब जवाब देने लगा है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के समय विकास के सपने दिखाकर वोट तो ले लेते हैं, लेकिन जीत के बाद जनता की परेशानियों को भूल जाते हैं। किशनगंज की जनता अब खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि जाम से स्थायी और ठोस समाधान चाहती है। नगर प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने लगी है।



