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ओबरा तापीय परियोजना से निकल रहा राखड़ युक्त पानी बना संकट, ग्रामीणों की स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा

समाज जागरण/ अनिल कुमार अग्रहरी

ओबरा/ सोनभद्र। ओबरा तापीय परियोजना से निकलने वाला राखड़ का प्रदूषित पानी इन दिनों आसपास के गांवों के लिए आफत बन गया है। राखड़ युक्त यह पानी नालों के जरिए सीधे नदी और तालाबों में पहुंच रहा है, जिससे न केवल जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं, बल्कि स्थानीय लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ता जा रहा है।स्थानीय निवासियों का कहना है कि जबसे राखड़ का बहाव नदी में बढ़ा है, पानी की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। अनेक स्थानों पर पानी का रंग बदला हुआ देखा जा रहा है और उसमें दुर्गंध भी फैलने लगी है। ग्रामीणों के अनुसार इस पानी का उपयोग करने से लोगों में त्वचा संबंधी समस्याएं, आंखों में जलन और पेट की बीमारियां आम हो गई हैं। पशुओं के स्वास्थ्य पर भी इस प्रदूषण का बुरा असर दिखने लगा है। ग्राम वासियों ने कई बार इस मुद्दे को प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के सामने उठाया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि परियोजना प्रबंधन को राख निष्पादन के लिए सुरक्षित व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि राखड़ जल स्रोतों में न पहुंचे। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि राखड़ का सीधा बहाव जल स्रोतों में जाने से भारी धातुओं की मात्रा बढ़ जाती है, जो दीर्घकाल में मानव स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह क्षेत्रीय पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ओबरा तापीय परियोजना से निकलने वाले राखड़ के पानी के निष्पादन की समुचित व्यवस्था की जाए। साथ ही दूषित जल के नमूनों की जांच कर वास्तविक स्थिति उजागर की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दुबारा न उत्पन्न हो। वहीं जिला प्रशासन ने कहा है कि मामले की जानकारी ली जा रही है और संबंधित विभाग के अधिकारियों को जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। आवश्यक होने पर परियोजना प्रबंधन को पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप कार्रवाई करने के लिए बाध्य किया जाएगा।


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