जनप्रतिनिधियों के निर्देशों की अनदेखी, जनता परेशान—जिम्मेदारी किसकी? *सीएमओ मैहर या कलेक्टर मैहर?
मैहर। नगर में लगातार बढ़ती ठंड ने आमजन का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। कड़ाके की ठिठुरन से मजदूर वर्ग, बुजुर्ग, रात्री में यात्रा करने वाले राहगीर सहित दूर–दराज से मां शारदा देवी के दर्शन करने पहुँचने वाले भक्तों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती गीता संतोष सोनी ने 24 नवंबर 2025 को मुख्य नगरपालिका अधिकारी को पत्र लिखकर नगर के प्रमुख चौराहों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में तत्काल अलाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए थे।
निर्देश के सात दिन बाद भी शून्य कार्रवाई
आश्चर्यजनक रूप से पत्र जारी हुए पूरा एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी नगरपालिका द्वारा अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई। इससे आमजन में नाराजगी बढ़ रही है तथा यह सवाल उठ रहा है कि—
क्या अधिकारी जानबूझकर नपा अध्यक्ष को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं?
क्या जनप्रतिनिधियों की बात सुनना अब अधिकारियों के एजेंडे में नहीं?
स्थानीय नागरिकों में चर्चा है कि—
“कहने को तो भाजपा सरकार है, नेतृत्व में सांसद, विधायक, अध्यक्ष सभी हैं, लेकिन अधिकारी–कर्मचारी किसी की भी नहीं सुन रहे। इसी का परिणाम है कि जनता ठंड में परेशान है और जनप्रतिनिधियों की छवि धूमिल हो रही है।”
जनता ठिठुर रही, रस्साकसी जारी
ठिठुरन भरी सर्द रातों में अलाव की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की लापरवाही से हालात बदतर होते जा रहे हैं।
जनता का कहना है कि—
“जनप्रतिनिधि और अधिकारी आपस में रस्साकसी करते रहें, पर कम से कम जनता की समस्या तो दूर करें।”
अब बड़ा सवाल
इस लापरवाही से यदि किसी प्रकार की कोई दुर्घटना या संकट उत्पन्न होता है तो उसकी जिम्मेदारी सीएमओ मैहर की होगी या कलेक्टर मैहर की?
जनता जवाब चाहती है—और तत्काल राहत भी।



