सरकार ने 60 परिवारों का आशियाना उजाड़ा, भीख मांग कर बनाया था घर

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
किशनगंज नगर परिषद क्षेत्र स्थित खगड़ा में गरीबों का आशियाना पर चला बुलडोजर।जिसका घर बुलडोजर चलाकर तोड़ दिया बुजुर्ग महिला कहती हैं- हमने एक-एक रुपए जोड़कर झोपड़ी बनाई थी। उसे भी अधिकारियों ने बख्शा नहीं। चंद मिनटों में हमारे घर को उजाड़ दिया । अब हमारा कोई सहारा नहीं है। पूरी रात हमने खुले आसमान के नीचे गुजारी है। कपड़े तक भींग गए थे। बच्चे ठंड में कांप रहे हैं, वो हमें मोहलत देने के लिए 50 हजार मांग रहे थे। हम कहां से लाते रूपए नहीं दे पाए तो सब बुलडोजर से गिरा दिया। हर तरफ टीन शेड, बांस, उजड़ा हुआ घर जमीन पर बिखरा पड़ा हुआ था। लोगों के चेहरे पर सिर्फ एक ही चिंता थी कि आज की रात कैसे गुजारेंगे। सभी अपने बच्चों को कंबल में दबाए जमीन पर खुले आसमान के नीचे बैठे थे।

पीड़ित महिला तारा देवी ने बताया, ‘सड़क किनारे मेरी दुकान थी, जिसे हम पहले ही खाली करवा चुके थे। मंगलवार दोपहर अधिकारी पहुंचे तो हमने उनसे 1 घंटे की मोहलत मांगी।इस दौरान एक अधिकारी ने कहा, अगर आप पैसा देंगे तो दुकान नहीं तोड़ेंगे। अगर पैसा नहीं देंगे तो दुकान तोड़ दी जाएगी।
अधिकारी हमेशा हर दुकानदार से 50 हजार रुपए की मांग करते हैं। पैसा दीजिए, तब दुकान छोड़ देंगे। इस संबंध में हमने सीनियर अधिकारी से शिकायत की है, लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की।
सरकार से हमारी यही मांग है कि वो हमें थोड़ा-थोड़ा जमीन दे दें तो सब लोग एक साथ घर बनाकर रहेंगे। मंगलवार, बुधवार की रात मैंने 4 बच्चों के साथ इस ठंड में खुले आसमान के नीचे गुजारे हैं।’
तारा देवी ने बताया, ‘जब बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हुई, उस समय मेरे दो बच्चे घर के अंदर सो रहे थे। इसके बावजूद मेरे घर को तोड़ना शुरू कर दिया। हमने बुलडोजर चलाने वालों से विनती की रुक जाइए, बच्चे अंदर हैं। इसमें मेरे बच्चों के साथ भतीजे-भतीजी और मेरे पिता को चोटें आई हैं।
प्रमिला देवी ने कहा, हमारे झोपड़ियों को तोड़ दिया गया है। अब हम बच्चे को लेकर कहां जाएंगे। हमें सरकार पैसा या जमीन दे तो हम फिर अपने बच्चों को छत दे पाएंगे। हमें नहीं पता सम्राट चौधरी कौन है। हमें बस अपना घर चाहिए।
खटिया बाजार की छठिया देवी बताती हैं, ‘हम इसी दुकान में रहते हैं, इसी में चाय बेचकर अपना दवा का खर्च निकालते है। अधिकारी आए तो बोले खाली कीजिए। हमने कहा 5 मिनट दे दीजिए, लेकिन उन्होंने कहा, एक मिनट भी नहीं देंगे।’
‘मैं इतनी दहशत में थी कि मैंने अधिकारियों से कहा, अगर हमारा घर तोड़ा तो हम लाइन के तार पकड़कर झूल जाएंगे, मर जाएंगे, लेकिन सामान नहीं हटाएंगे। फिर भी वे हमारा घर तोड़ने की कोशिश करने लगे।’
‘इसके बाद हमने अधिकारियों के पैर पकड़ लिए, तब जाकर उन्होंने हमारा घर छोड़ दिया। इसके बाद हमने उनसे एक दिन की मोहलत मांगी है। हम आज जगह खाली कर देंगे।
घर तोड़ने में लोगों का सारा सामान टूट गया है।
80 साल की बुजुर्ग महिला ने कहा, जैसे ही बुलडोजर मेरे घर के पास आया, हमने कहा रूकिए। थोड़ा सा समय दीजिए, ताकि घर का सारा सामान बाहर निकाल लेंगे, लेकिन अधिकारी लोग नहीं माने और घर पर बुलडोजर चढ़ा दिया।
हम भीख मांगकर झोपड़ी बनाए थे, उसे भी अधिकारियों ने बख्शा नहीं। हमारा कोई सहारा नहीं है। कल रात ओस में गुजारे हैं। अब कैसे जिएंगे।
छठिया देवी ने आगे बताया, हम यहीं रहकर चाय बेचते हैं, खाना खाते हैं। इसी दुकान में हमारा सब कुछ है। मेरा पति अब नहीं है, उनकी मौत हो चुकी है। चाय बेचकर ही हमारा घर चलता है। हम रोजाना 50 रुपए किराया देकर बिजली का बिल भी चुकाते हैं। इतना बताते ही, छठिया देवी की आंखों से लगातार आंसू बहते रहे। उनका कहना है, ये सिर्फ एक दुकान नहीं, मेरी पूरी जिंदगी का ठिकाना था। पीड़ित लोगों ने बताया जैसे ही हमने अपनी दुकान का ताला खोला, तभी प्रशासन आ गया और बोला, दुकान मत खोलिए, यह भी टूटेगी। हमने हाथ जोड़कर कहा, सर, आधा घंटे का समय दे दीजिए। हम अपना सारा सामान हटा लेते हैं। लेकिन वह लोग सामान बाहर फेंकना शुरू कर दिया ताकि कुछ बचा लें, लेकिन प्रशासन ने एक मिनट भी नहीं दिया। जेसीबी अंदर घुस आई और पीछे से हमारी दुकान तोड़ दी गई। करीब 10 हजार का सामान बर्बाद हो गया।
मोहम्मद शफी ने कहा कि ‘जिसको तोड़ने का ऑर्डर था, उसे छोड़ दिया। वहीं, जिसका कोई ऑर्डर नहीं था, उस गरीब की दुकान तोड़ दी गई। हमने सरकार का क्या बिगाड़ा है? छोटे पूंजी वालों को हमेशा डराकर रखा जाता है, बड़े उद्योगपति नहीं डरते। सिर्फ गरीबों पर ही बुलडोजर और लाठी चलती है। जिसने करोड़ों रुपए खर्च करके अवैध तरीके से बड़ा मकान बनाया है, उसे नहीं छुआ जाता, लेकिन जिसकी प्लास्टिक की झोपड़ी है, उसी को तोड़ दिया जाता है।

पीड़िता नूर बेगम ने बताया, मेरे घर को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया गया है। एक बांस भी नहीं बचा है। अब 4 बच्चों को लेकर हम कहां जाएंगे। मेरे पति की मौत हो गई है। बच्चों को कैसे पालेंगे। घर में रखा सामान भी चूर-चूर हो गया। अब हमारे पास कुछ नहीं बचा है।
मोसिना ने बताया, हमारा घर तोड़ दिया गया है। अब न रहने के लिए जगह है और न खाना बनाने के लिए अनाज। अब सड़क किनारे बैठकर खाना बना रहे हैं, ताकि बच्चों को कुछ खिला पाए।
लक्ष्मण पासवान ने बताया, पूरी रात ओस में भींग कर गुजारी है। बच्चों को किसी तरह से ढक दिया था, लेकिन फिर भी रात में चल रही ठंडी हवा के कारण बच्चे ठिठुर रहे थे। हमारे दुकान को सरकार ने तोड़ दिया। अब गुजारा कैसे करेंगे ये समझ नहीं आ रहा है।
मेले की जमीन पर था अतिक्रम खगड़ा में पशु मेला लगता था। इस मेले की 3 एकड़ जमीन पर अतिक्रमणकारियों का कब्ता था, जो बिहार सरकार की है। यहां 60 से अधिक परिवार रहा करते थे।

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