अमलाई। नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय महापर्व पूर्ण आस्था के साथ मनाया जाता है। नगर परिषद परिसर स्थित बरगवां वार्ड क्रमांक 3, वार्ड क्रमांक 13 संजयनगर तलैया, इंदिरा नगर, अमलाई थाना रोड स्थित तलैया में कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रथम दिन,नहाय-खाय,शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक है।व्रती सुबह जल्दी उठकर नदी या तालाब में स्नान करते हैं और घर की सफाई करते हैं।सात्विक भोजन में चावल,चने की दाल और लौकी की सब्जी शामिल होती है,जिसे बिना लहसुन-प्याज और कम मसालों से पकाया जाता है।
खरना संयम और
भक्ति का दिन
दूसरे दिन 26 अक्टूबर बुधवार को खरना के साथ नगर परिषद बरगवां वार्ड क्रमांक 3 स्थित तलैया, संजय नगर,मलाई थाना रोड में दोपहर 12 बजे सूर्यषष्ठी छठ महापर्व के पूजा वंदन के साथ आरंभ होगा।
खरना,संयम और धैर्य का प्रतीक है।व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं।सूर्यास्त के बाद छठी मइया की पूजा में गुड़ की खीर,रोटी और फल अर्पित किए जाते हैं।प्रसाद बनाने में मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी का उपयोग होता है।पूजा के बाद व्रती और परिवारजन प्रसाद ग्रहण करते हैं और 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत की शुरुआत होती है।
डूबते और उगते
सूर्य को अर्घ्य
तीसरे दिन 27 अक्टूबर को सूर्यास्त से पूर्व प्रथम अर्घ्य व्रती नदी या तालाब के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।बांस की टोकरी में ठेकुआ,फल और अन्य प्रसाद सजाकर दूध और जल अर्पित किया जाता है।
चौथे दिन 28 अक्टूबर को सूर्योदय के साथ द्वितीय अर्घ्य अर्पित कर छठी मैया की पूजा संपन्न की जाएगी।सुबह सूर्योदय के समय उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है और प्रसाद बांटा जाता है।यह सूर्य षष्ठी महापर्व नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है।
सामाजिक और
सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं,बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।पूरा समुदाय घाटों को सजाता है और लिंग,जाति या आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना शामिल होता है।छठ के गीत और परंपराएं इसे और जीवंत बनाते हैं।यह पर्व भक्ति,अनुशासन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है।
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