समाज जागरण दैनिक
विश्वनाथ त्रिपाठी
प्रतापगढ़।भगवान का अवतार दुष्टों के दमन धर्म की रक्षा के लिए भारत भूमि पर हमेशा होता रहा है ।द्वापर के बाद बुद्ध , महावीर ,गुरु नानक , शंकराचार्य जैसे लोग समय समय पर अवतरित हो कर सनातन धर्म की रक्षा ही नहीं विसंगति रूपी राक्षसों पर प्रहार कर उसके मूल रूप को सबके समक्ष उपस्थित किया। ये बातें सिया पूरे चंदई में राम भारत तिवारी के यहां चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा व्यास आचार्य प्रदीप जी ने कहीं ।
आचार्य जी भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करें हुए की रोचक प्रसंगों को सुनाते हुए माखन चोरी का सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया । गोपियां बालक कृष्ण को पकड़ कर मां यशोदा के पास लेजाकर शिकायत करती हैं मां यशोदा क्रोधवश बालक कृष्ण को ऊखल से बांध देती है । भगवान ऊखल की लीला के माध्यम से यमलार्जुन का उद्धार कर देते हैं।
पूतना का वध , शकटासुर की कथा,वकासुर और गोवर्धन आदि लीलाओं का वर्णन श्रोतागण मंत्र मुग्ध हो कर सुन रहे थे भक्तों से खचाखच भरा पंडाल कथा की रोचकता का प्राण दे रहा था।
कथा का श्रवथ राम भारत तिवारी अपने पितरों के उद्धार के लिए श्रवण कर रहे हैं ।
बिना कुल गुरू के मानव का उद्धार नहीं होता यह वर्णन शास्त्रों में बार बार वर्णन आया है।
बिन गुरु भव निधि तरइ कोई,।
जउ विरंचि शंकर ,सम होई।।
मंच पर विराजमान गुरुदेव पं विमलेश शुक्ल की कृपा से ही पावन क्षण का साक्षात्कार हो रहा है ।
पं राम सूरत व आचार्य अंकुश द्वारा किया जा रहा भागवत पाठ वे वेद पाठ बहुत ही आकर्षक व कर्ण प्रिय है ।
क्षेत्र के संभ्रांतों में मनीराम,बालकृष्ण,श्रीकृषण श्रीराम, चंद्रकांत शशिकांत,संतोष तिवारी, आशुतोष,अजय विजय,पंकज आदि उपस्थित रहे कर बड़ें मनोभाव से कथा का श्रवण कर रहे हैं ।
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