•-न बिक्री, न बैनामा, फिर भी बने सहखातेदार, मूल काश्तकारों ने लगायी न्याय की गुहार
ब्यूरो चीफ/ समाज जागरण
सोनभद्र। राजा को पता ही नहीं, भीलों ने वन बांट लिया——-जी हां उक्त कहावत मीतापुर ग्राम में मूल काश्तकारों के कास्त की जमीन में हेराफेरी मे शत प्रतिशत चरितार्थ हो रहा है।चकबंदी विभाग की मेहरबानी का नतीजा है कि मीतापुर गांव में बिना बिक्री, बिना बैनामा के ही मूल खातेदारों के जमीन में किसी दूसरे का नाम अंकित करते हुए सह खातेदार बतौर खतौनी में दर्ज कर दिया गया है। इसकी जानकारी तब हुई जब मूल काश्तकारों ने अपने खतौनी का अवलोकन किया। जानकारी मिलते ही मूल काश्तकारों समेत सहखातेदारो में हड़कंप मच गया।उन्होंने इस संबंध में सहायक चकबंदी अधिकारी ओबरा सोनभद्र को एक लिखित प्रार्थना पत्र देकर जांच करवाकर उचित कार्रवाई करवाते हुए न्याय दिलवाये जाने की गुहार लगायी है।
इस संबंध में सहायक चकबंदी अधिकारी ओबरा सोनभद्र को दिए गए शिकायती पत्र में मूल काश्तकार रामलाल पुत्र रत्नाकर,
नवरत्न पुत्र वंशधारी, संतकुमार पुत्र दशिसा, मातादीन पुत्र इंद्रपति, बबिया पत्नी मातादीन कविया पत्नी राम सनेही, मिठाई पुत्र रामदुलारे, संतोष पुत्र मंडल ने कहा है कि ग्राम-मीतापुर,
पोस्ट-करगरा, तहसील- ओबरा के मूल सह-खातेदार है तथा ग्राम चकबन्दी के प्रक्रिया में लगा हुआ है, खाता सं0-0062, 0063, 00131,00132 व 00133 में गलत तरीके से सुगवन्ता पुत्र रामचरन का नाम दर्ज है। उन्हें मालूम नहीं था कि सुगवन्ता पुत्र राम चरन का नाम उक्त खाता संख्या में सह-खातेदारों में कैसे आया है, जो कि सुगवन्ता नाम का व्यक्ति पूरे ग्राम समाज में नहीं है और न ही काश्तकारों ने कोई जमीन बेचा है और न ही उक्त सुगवन्ता को अपना जमीन बैनामा करवाया है। फिर भी सुगवन्ता का नाम सह-खातेदारों में गलत तरीके से आ गया है जबकि मूल काश्तकारो को भली-भाँति जानकारी है कि सुगवन्ता पुत्र रामचरन का नाम गलत व फर्जी तरीके से दर्ज है।मूल काश्तकारों ने अविलंब ही सुगवन्ता पुत्र रामचरन का नाम निरस्त करते हुए शेयर का विभाजन न किया जाय ताकि चकबन्दी की प्रक्रिया पूरी हो सके तथा न्यायहित कार्यवाही की जाय,की गुहार लगायी है।



