दैनिक समाज जागरण, ( महेन्द्र जावला बहल )
बहल, 25 अक्टूबर। पौधारोपण कर देने से पर्यावरण संरक्षण नहीं किया जा सकता। पर्यावरण संरक्षण रोपित पौधे को स्वस्थ्य रखने के लिए खाद, पानी, सर्दी व गर्मी से बचाव और प्रदूषण से बचाव को पानी की बौछारों से नहलाना भी पड़ता है। यह सब चैहड़ खुर्द के सरपंच संदीप श्योराण पिछले दो वर्षों से बखुबी कर जनमानस को भी वास्तविक पौधारोपण कर वटवृक्ष बनाने की प्रेरणा दे रहे हैं। सरपंच संदीप श्योराण ने सार्वजनिक स्थलों व गांव के मुख्य मार्गो और सड़क किनारे व्यवस्थित पौधारोपण पिछले वर्ष से करवाते आ रहे हैं और ये पौधे गांव व सड़क मार्ग की शान को चार चांद लगा रहे हैं। इसे जुनून ही कहा जा सकता है कि सरपंच ने सड़क किनारे रोपित पौधों की सुरक्षा में लोहे की मजबूत जालीदार गार्ड, सर्दी व गर्मी से बचाव को सरकंडों के सुरक्षा कवच, समय समय पर पानी की सिंचाई व जरूरत की खाद दवाएं और दिवाली पर्व के बेहद हानी कारक प्रदूषण के प्रभाव से निजात दिलाने को पौधों को स्वच्छ व ताजे पानी की बौछारों से तल से शीर्ष तक नहला रहे हैं। यह पहली बार नहीं हर जरूरत पर पौधों को नहलाते है और यही वजह है कि सड़क किनारे लगे पौधे हर राहगीर को अपनी हरियाली और स्वच्छता की वजह से आकर्षित कर रहे हैं। सरपंच संदीप ने बताया कि केवल पौधा रोपण करना ही इसका उद्देश्य नहीं है। उद्देश्य तो इनको वट वृक्ष बनाने का है। जब सारे गांव के लगाए गए करीब ढाई हजार वर्ष वट वृक्ष बनकर तैयार हो जाएंगे तो जीव-जंतु, पशु-पक्षी को भी इसका फायदा मिलेगा और यह वास्तविक पर्यावरण संरक्षण की ओर एक कदम साबित रहेगा। कस्बे बहल के पेड़ों की हरियाली उसके लिए प्रेरणा साबित हो रही है। संदीप ने हर समाज सेवी संस्था और ग्राम पंचायत को पौधारोपण को वास्तविक जीवन का आधार बनाने की नसीहत भी दी।



