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कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा

बिकास राय
ब्यूरो चीफ गाजीपुर
दैनिक समाज जागरण

गाजीपुर जनपद के मां काली मंदिर यूसुफ पुर मुहम्मदाबाद में आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में अपने मुखारविंद से मानस मंदाकिनी प्रवाहित करते हुए साध्वी साधना शास्त्री ने कहा की यह संसार कर्म फल के आधार पर चल रहा है ज़ब भगवान ने संसार को बनाया तो यह नियम बना दिया की जो जैसा कर्म करेगा उसे उसका फल स्वयं भोगाना पड़ेगा इस संसार को नियमबद्ध, क्रमबद्ध चलाने के लिए भगवान ने कर्मफल का विधान बनाया
कर्म करने की स्वतंत्रता भगवान ने सबको दे दी
लेकिन यह नियम बना दिया की जो जैसा कर्म करेगा उसे उसका फल स्वयं भोगना पड़ेगा और भगवान अपने को भी कर्मफल से दूर नही रखे अपने को भी इस व्यवस्था मे बांध दिए
भगवान को भी अपने कर्मो का फल भोगना पड़ा है
ज़ब राम जी ने छिपकर बालि का बध किया तो इसका फल रामजी को कृष्ण जन्म मे भोगना पड़ा
ज़ब दसरथ जी ने श्रवण कुमार को बाण से मारा और श्रवण कुमार के माता पिता ने श्राप दे दिया की जैसे हम अपने पुत्र बिरह मे तड़प तड़प कर मर रहे है तुम भी पुत्र बिरह मे तड़प तड़प कर मरोगे तो राजा दशरथ की मृत्यु राम के बिरह मे तड़प तड़प कर हुई
भगवान अपने पिता को भी कर्मफल से दूर नाही कर पाए इसलिए अपने कर्म के प्रति सजग रहे सतर्क रहे
अच्छा कर्म करें।


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