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यूजीसी के नये नियम पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को मायावती ने बताया उचित, कहा – “पहले सभी पक्षों को भरोसे में लिया जाता तो तनाव पैदा ही नहीं होता”



नई दिल्ली। देशभर के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में जातिवादी भेदभाव की घटनाओं को रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा बनाए गए नये नियमों को लेकर बढ़ते विवाद के बीच आज माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट के इस फैसले को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन मायावती ने पूर्णतः उचित और समयानुकूल बताया है।

बहन मायावती ने कहा कि यूजीसी द्वारा जारी नये नियमों के चलते विश्वविद्यालय परिसरों में “सामाजिक तनाव जैसा माहौल” बन गया था। उन्होंने कहा कि यदि यूजीसी नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में ले लेती, तो यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।

उन्होंने कहा—
“देश में सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा नहीं होता, यदि यूजीसी नये नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों को भरोसे में लेती और जांच समितियों में अपरकास्ट समाज को प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांत के तहत उचित प्रतिनिधित्व देती।”

मायावती ने आगे कहा कि किसी भी नियम या व्यवस्था को लागू करते समय निष्पक्षता, पारदर्शिता और समान प्रतिनिधित्व बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद अब यूजीसी सभी वर्गों से संवाद कर एक संतुलित और न्यायसंगत व्यवस्था तैयार करेगी।


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