google-site-verification: google2b21991adbe5cec3.html

व्यक्ति के स्वरूप के आधार पर उसके व्यक्तित्व की माप नही कर सकते-हरिप्रकाशजी

बिकास राय
ब्यूरो चीफ गाजीपुर। दैनिक समाज जागरण

गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद तहसील अंतर्गत लौवाडीह में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन धर्मदूत हरिप्रकाशजी महाराज ने अपने मुखारविंद से उपस्थित श्रोताओं को ज्ञान भक्ति एवं वैराग्य की कथा का श्रवण कराते हुए वामन भगवान के दिव्य चरित्र और उनके अवतरण का भावपूर्ण वर्णन किया। कथावाचन में आपने कहा कि भगवान विष्णु का पाँचवाँ अवतार वामन रूप धर्म की पुनर्स्थापना, अहंकार के विनाश और दैत्यराज बलि को मोक्ष प्रदान करने का प्रतीक है।वामन भगवान की कथा यह संदेश देती है कि किसी भी व्यक्ति का महत्व कम नही होता है।किसी भी व्यक्ति के स्वरूप के आधार पर उसके व्यक्तित्व की माप नही कर सकते है।राजा बलि ने भी भगवान के सूक्ष्म स्वरूप को कम समझने की भूल की और उसका परिणाम भुगतना पड़ा।हरिप्रकाशजी महाराज ने कहा कि बताया कि जब राजा बलि के पराक्रम से तीनों लोक संतप्त हो उठे, तब देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु वामन रूप में प्रकट हुए। नन्हे ब्राह्मण बालक के रूप में उन्होंने यज्ञशाला में जाकर राजा बलि से ‘‘तीन पग भूमि’’ का दान माँगा। राजा बलि ने दान तो दे दिया, परंतु जैसे ही वामन ने विराट रूप धारण किया, ब्रह्मांड उनके चरणों में समा गया। दो ही पग में पृथ्वी और आकाश नाप लेने के बाद वामन ने तीसरा पग बलि के सिर पर रखा—और इसी क्षण दैत्यराज का अहंकार क्षीण होकर उन्हें दिव्य लोक में स्थान मिला।इस मौके पर एक वामन भगवान की एक सुंदर झांकी प्रस्तुत की गयी
कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने ‘जय वामन देव’ के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय कर दिया। कथावाचक ने कहा कि वामन लीला मनुष्य को यह संदेश देती है कि दान, नम्रता और धर्म की रक्षा ही जीवन का वास्तविक संबल है, जबकि अभिमान विनाश का कारण बनता है।कथा श्रवण में चंद्रभूषण राय,चंदन शर्मा,बच्चन पांडेय,हृदय नारायण पांडेय,रविन्द्र नाथ राय,संजय राय,ओमप्रकाश शर्मा,गुड्डू खरवार ग्राम प्रधान रविशंकर राय संजू समेत अन्य लोग उपस्थित रहे।


Discover more from समाज जागरण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

🛍️ Today’s Best Deals

(Advertisement)