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संस्कारों की विजय, बुराइयों का अंत – बालघर में हर्षोल्लास से मनाया गया दशहरा पर्व

अश्विनी वालिया कुरुक्षेत्र
सत्य की असत्य पर, धर्म की अधर्म पर और अच्छाई की बुराई पर विजय का संदेश देने वाला पावन पर्व दशहरा , श्रीमद्भगवदगीता प्राथमिक विद्यालय बालघर में हर्षोल्लास, उत्साह एवं रचनात्मक गतिविधियों के साथ विद्यालय प्रधानाचार्या चेतना वशिष्ठ जी के नेतृत्व में मनाया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित विभिन्न गतिविधियों ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों की सुंदर झलक प्रस्तुत की।

इस अवसर पर कक्षा अरुण से पंचम के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, रामायण प्रश्नोत्तरी, पात्र-अभिनय, धनुष-बाण निर्माण, पाँच बुरी आदतों को त्यागने की गतिविधि तथा कागज़ से रावण निर्माण जैसी रोचक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने रामायण के पात्रों के माध्यम से मर्यादा, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त की। वहीं, रचनात्मक गतिविधियों ने उनकी कल्पनाशीलता, कलात्मक अभिव्यक्ति और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण पाँच बुरी आदतों को त्यागने की गतिविधि रही, जिसके माध्यम से प्रधानाचार्या द्वारा बच्चों को क्रोध, झूठ, आलस्य, ईर्ष्या और अहंकार जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहने का संदेश दिया गया। कागज़ से रावण बनाने की गतिविधि ने बच्चों को यह समझने का अवसर दिया कि दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का संकल्प लेने का भी प्रतीक है। जय श्री राम के उद्घोष से नन्हे मुन्ने विद्यार्थियों एवं आचार्यों द्वारा रावण के पुतले का दहन किया गया।

विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती चेतना वशिष्ठ ने इस प्रकार की गतिविधियों के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करना भी है। ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति से जोड़ने के साथ-साथ जीवन में सत्य, सदाचार और सकारात्मकता अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने बताया कि रावण का अंत तभी सार्थक है, जब हम अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करें।
गीता प्राथमिक विद्यालय, बालघर, का यह आयोजन “Learning Beyond the Classroom” की भावना को साकार करता हुआ ज्ञान, संस्कार और रचनात्मकता का प्रेरणादायक संगम बना।


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