मां भगवती कात्यायनी का षोडशोपचार व महामंत्र के साथ पूजन

: नवरात्रे देवी पूजन का पर्व ही नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान का संदेश भी देता है : श्री महंत डॉक्टर अशोकगिरि

दैनिक समाज जागरण,( महेन्द्र जावला बहल )

भिवानी। नवरात्रि के षष्ठी दिवस पर मां भगवती कात्यायनी का पूजन-अर्चन श्रद्धा व उल्लास के साथ किया गया। हालूवास गेट स्थित सिद्ध पीठ बाबा जहर गिरी आश्रम में विशेष अनुष्ठान आयोजित हुआ। इस अवसर पर पीठाधीश्वर परम श्रद्धेय श्री महंत डॉ. अशोक गिरी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मंगलाचरण कर मां कात्यायनी का षोडशोपचार पूजन संपन्न करवाया।

महंत डॉ. अशोक गिरी महाराज ने अपने आशीर्वचन में बताया कि ऋषि कात्यायन की पुत्री ही कात्यायनी थीं, जिन्हें नवदुर्गा में षष्ठी तिथि पर पूजा जाता है। परंपरागत रूप से मां कात्यायनी का संबंध लाल रंग से माना गया है। योग साधना में इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होता है और पूर्ण आत्मसमर्पण से मां के चरणों में निवेदित हो जाता है। उन्होंने कहा कि मां कात्यायनी की पूजा प्रातःकालीन स्नानादि के बाद षोडशोपचार विधि से करनी चाहिए। मधु का भोग लगाना अनिवार्य है और लाल पुष्प अर्पित कर भगवती का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

श्री महंत जी ने आगे कहा कि स्कंदपुराण के अनुसार कात्यायन ऋषि याज्ञवल्क्य के पुत्र थे और उन्होंने ‘श्रौतसूत्र’ व ‘गृह्यसूत्र’ जैसे ग्रंथों की रचना की थी। मां कात्यायनी की आराधना से साधक को सहज रूप से देवी के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त होता है।पूरे आश्रम में मां कात्यायनी के महामंत्र “कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि” की गूंज रही और वातावरण भक्तिमय हो उठा। नवरात्रि के इस पावन पर्व पर श्रद्धालुओं ने मां के चरणों में आत्मसमर्पण कर सुख-समृद्धि व मंगल की कामना की।

श्री महंत डॉक्टर अशोक गिरी महाराज ने कहा कि छठे नवरात्रे पर मां कात्यायनी की आराधना से साधक को साहस, ज्ञान और विजय का आशीर्वाद मिलता है। मां कात्यायनी आज्ञा चक्र में स्थित साधना की अधिष्ठात्री हैं, जो आत्मबल और आत्मविश्वास प्रदान करती हैं। नवरात्रि केवल देवी पूजन का पर्व नहीं, बल्कि नारी शक्ति के सम्मान का संदेश भी देता है। नारी ही सृष्टि की आधारशिला है, जो परिवार, समाज और राष्ट्र को ऊर्जा व प्रेरणा देती है। इस पावन अवसर पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम मातृशक्ति का आदर करें, बेटियों को समान अधिकार दें और नारी सामर्थ्य को पहचानते हुए उनके योगदान को सच्चा सम्मान दें।

इस धार्मिक अवसर पर बाबा कैलाश गिरी, बाबा दशरथ गिरी, कामाख्या गिरी, पंडित कार्तिक शास्त्री, पंडित दीपक पाठक, उदय शर्मा, नवीन पंडित, जयदेव कौशल, पंडित देवेंद्र शर्मा, पंडित रामनिहर, आचार्य बसंत शास्त्री, लेहसु नाई सहित अनेक संत-महात्मा, गणमान्य व्यक्ति व श्रद्धालु मौजूद रहे। वहीं स्थानीय भक्तों ने माता के जयकारों के बीच विशेष पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

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