
नागेन्द्र कुमार, ब्यूरोचीफ, दैनिक समाज जागरण, पूर्वी सिंहभूम
जमशेदपुर । परसुडीह स्थित गदड़ा में शुक्रवार को दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने 1 मई को सेंदरा पर्व मनाने की घोषणा की है. देवी-देवताओं की पूजा पाठ करने के बाद दलमा राजा ने इसकी घोषणा की. पूजा के बाद दलमा राजा ने सेंदरा वीरों के सेंदरा पर्व में शामिल होने के लिए गिरा सकम (निमंत्रण) छोड़ा. पूजा को लेकर दलमा राजा के घर में आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग जुटे. मांदर और धमसे की थाप के बीच पूजा की गई. मौके पर मौजूद लोगों में उत्साह का माहौल दिखा. दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने कहा कि इस बार सेंदरा पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा. 30 अप्रैल की आधी रात को सेंदरा वीर दलमा पर चढ़ाई करेंगे. जंगल में जो जानवर मिलेगा उसका शिकार किया जाएगा. आदिवासी समाज हर साल सेंदरा पर्व धूमधाम से मनाता है. पूजा के दौरान दाशमथ हांसदा, बेंडे बारजो, सुकराम किस्कू, लिटाबान सिंह, विशाल तिउ, विपीन तियू समेत सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे.
कई राज्यों के सैकड़ों वीर होंगे शामिल
दलमा राजा राकेश हेंब्रम ने बताया कि सेंदरा में ओडिशा, बंगाल, बिहार और असम जैसे राज्यों में सेंदरा वीरों को गिरा सकम (निमंत्रण) दिया गया है. हर साल सेंदरा में कई राज्यों से सैकड़ों वीर शामिल होते है. इस बार भी भारी संख्या में वीरों के शामिल होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि सेंदरा को लेकर वन विभाग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है. यह जंगल उनका है इसलिए वह सेंदरा करते है. वन विभाग उनके घर आकर अपनी बातों को रखता है पर इस बार विभाग की ओर से कोई भी मौजूद नहीं था.
सेंदरा को चलाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलेंगे
दलमा राजा श्री हेमब्रम ने कहा कि आदिवासी समुदाय और सरना धर्म को लुप्त नहीं होने दिया जाएगा इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने का विचार किया है. उन्होंने कहा कि पहले जंगलों में आदिवासी रहते थे. इसके बाद गांव बना और फिर शहर बना. आदिवासियों का जन्म जंगलों में ही हुआ है इसलिए आदिवासी जंगलों की पूजा करते है.
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