गाछपाड़ा में 2.86 करोड़ की सड़क बनी भ्रष्टाचार की मिसाल

गाछपाड़ा-नूनिया टोली मार्ग पर उखड़ी गिट्टियां, 5 साल के मेंटेनेंस दावे की खुली पोल

सड़क बनते ही शुरू हुई टूट-फूट, अब गहरे गड्ढों में तब्दील; ग्रामीणों ने उठाई उच्चस्तरीय जांच की मांग

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज
बिहार सरकार जहां ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क विकास और बेहतर कनेक्टिविटी के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं किशनगंज जिले का गाछपाड़ा-नूनिया टोली मार्ग इन दावों की जमीनी हकीकत उजागर करता नजर आ रहा है। करीब 2.86 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 2.700 किलोमीटर लंबी यह सड़क कुछ ही वर्षों में बदहाल होकर भ्रष्टाचार और लापरवाही की मिसाल बन गई है।


सड़क की गिट्टियां उखड़ चुकी हैं, डामर लगभग गायब हो चुका है और जगह-जगह बने गहरे गड्ढे राहगीरों के लिए खतरा बन गए हैं।
जानकारी के अनुसार, इस सड़क का निर्माण मार्च 2021 में पूरा हुआ था। निर्माण कार्य का जिम्मा ठेकेदार अंजार आलम को दिया गया था। योजना के तहत दावा किया गया था कि सड़क पांच वर्षों तक अच्छी स्थिति में रहेगी तथा उसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित ठेकेदार की होगी। इसके लिए लगभग 22.78 लाख रुपये की राशि मेंटेनेंस मद में निर्धारित की गई थी। नियमों के अनुसार मार्च 2026 तक सड़क की मरम्मत और गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसी और ठेकेदार पर थी।


हालांकि निर्माण पूरा होने के कुछ ही समय बाद सड़क की परत उखड़ने लगी। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी वाहनों के गुजरने के साथ ही सड़क टूटने और धंसने लगी थी। शिकायतों के बाद एक बार मरम्मत कार्य कराया गया, लेकिन स्थिति में कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि मुख्यमंत्री के किशनगंज दौरे से पहले सड़क की जल्दबाजी में मरम्मत कराई गई थी ताकि इसकी बदहाल स्थिति छिपाई जा सके। दौरा समाप्त होते ही सड़क फिर से टूटकर गड्ढों में तब्दील हो गई।
ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े और भारी वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क का निर्माण मजबूत आधार और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होना चाहिए था, लेकिन निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और तकनीकी मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।


बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन बाइक सवार और राहगीर हादसों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी सड़क की वास्तविक स्थिति देखने तक नहीं पहुंचे। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य, मेंटेनेंस फंड के उपयोग तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।


ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मरम्मत नहीं कराई गई, तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब सड़क की आयु पांच वर्ष निर्धारित थी, तो आखिर चार साल के भीतर ही यह सड़क खंडहर जैसी स्थिति में कैसे पहुंच गई?
वहीं, मामले में ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता विद्यानंद प्रसाद ने बताया कि सड़क को पीडब्ल्यूडी को हस्तांतरित कर दिया गया है और जल्द ही इसके निर्माण एवं मरम्मत का कार्य कराया जाएगा।

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