मैहर । मैहर नगर में विगत 24 घंटे की मूसलधार बारिश ने नगर पालिका परिषद और प्रशासन के उन तमाम विकास कार्यों की कलई खोल दी, जिनका प्रचार ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार ने बड़े-बड़े होर्डिंग्स के माध्यम से किया था। सड़कों पर भरा पानी, उफनती नालियाँ, सीवेज की दुर्गंध और बहती सड़कें इस बात का प्रमाण हैं कि ठेकेदारी सिस्टम और जनप्रतिनिधियों के बीच अपवित्र गठजोड़ से जनता की उम्मीदें लगातार रौंदी जा रही हैं।
कांग्रेस के जिलाध्यक्ष धर्मेश घई का तीखा प्रहार मैहर में विकास कार्यों में गुणवत्ता नाम की चीज़ ही नहीं बची कांग्रेस के जिला अध्यक्ष धर्मेश घई ने कहा कि देवी मंदिर मार्ग उदयपुर मार्ग और अन्य प्रमुख सड़कों की स्थिति का परीक्षण कराया जाये यहां किये जा रहे कार्यो मे भ्रष्टाचार सीमा से पार हुआ है । सीवरेज लाइन के निर्माण में मानक निर्देशों और पीडब्ल्यूडी मैन्युअल के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं। कोई निर्धारित ढाल नहीं, न समुचित ढक्कन, न पानी निकासी की व्यवस्था यह सब भ्रष्टाचार का जीवंत प्रमाण है।”
उन्होंने आगे कहा कि
देवी मार्ग से लेकर नगर के आंतरिक मार्गों तक, जहां भी नगर पालिका ने निर्माण कराया है, वहाँ केवल बजट खर्च हुआ है – विकास नहीं। कायाकल्प योजना तो पूरी तरह ‘भ्रष्टाचार योजना’ बन गई है। और विडंबना देखिए कि जिनके कंधों पर जवाबदेही थी, उन्हीं के घर के सामने बनी सड़क पहले ही बारिश में बह गई।
मनीष पटेल ने कहा चुप्पी संधि का प्रमाण है, कांग्रेस सिखाएगी सबक
पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मनीष पटेल ने भी मौके पर पहुंचकर नगर के हालातों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा –
“अगर ठेकेदार आपके नियंत्रण में नहीं हैं, तो आपकी चुप्पी भी संदिग्ध है। यह चुप्पी एक संधि है भ्रष्टाचार से, निकम्मेपन से, और जनता से विश्वासघात करने वालों से। कांग्रेस इस विश्वासघात का जवाब आंदोलन से देगी।
पटेल ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में कांग्रेस जन-आंदोलन की राह पकड़ेगी और “घोषित विकास” की आड़ में हो रहे “अघोषित विनाश” को उजागर करेगी।
प्रभात द्विवेदी बोले बरसात नहीं, प्रशासन का असली चेहरा उजागर हुआ है
मैहर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रभात द्विवेदी ने कहा यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि यह प्रशासनिक आपदा है। हम यह सत्य जनता के सामने रखेंगे कि यह सब लापरवाही और भ्रष्टाचार की उपज है।
तकनीकी उल्लंघन
नगर पालिका अधिनियम की धारा 76(1) के अनुसार निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, जल निकासी, और स्थायित्व की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय प्रमुख की होती है। सीवरेज लाइन के निर्माण हेतु BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के निर्देशों का पालन अनिवार्य होता है, जिसका उल्लंघन यहाँ स्पष्टत देखा गया।
मैहर की धरती, मां शारदा का धाम आज भ्रष्टाचार की त्रासदी झेल रही है। अब जब नेता तकनीकी विश्लेषण और जनता एक मंच पर आ चुके हैं तो यह तय है कि आने वाले दिनों में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन जन्म लेगा, जो ‘विकास के नाम पर धोखा’ देने वालों से हिसाब मांगने के लिए तैयार है।



