मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के मार्गदर्शन तथा माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश / अध्यक्ष महोदय श्री काशीनाथ सिंह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, शहडोल के निर्देशानुसार एवं श्री सुशील कुमार अग्रवाल जिला न्यायाधीश / अध्यक्ष तहसील विधिक सेवा समिति, बुढ़ार की अध्यक्षता में दिनांक 13.12.2025 को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।
लोक अदालत में 04 खंडपीठ श्री सुशील कुमार अग्रवाल जिला न्यायाधीश, श्रीमती आकांक्षा तेकाम, श्री ऋषव दीक्षित, श्री लक्ष्मण रोहित न्यायिक मजिस्टेट संचालित रही। साथ ही न्यायालीन सहभागिता हेतु अति. सहायक अभियोजन अधिकारी श्री कुर्वेद शाह ठाकुर, संतोष कुमार पाटले, अपर लोक अभियोजक अधिकारी एवं न्यायालयीन वरिष्ठ कर्मचारी श्रीमती अनीता शर्मा एवं नायब नाजिर श्री राजकुमार पैकरा एवं अन्य कर्मचारी व पुलिस विभाग द्वारा न्यायालयीन कार्य में विशेष सहयोग रहा।
उक्त न्यायालयीन प्रकरणों में बुढ़ार न्यायालय के अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री जयकांत मिश्रा तथा अन्य पदाधिकारी गढ़ एवं अधिवक्ता मौजूद रहे। साथ ही नेशनल लोक अदालत के दिन शासन के समस्त विभाग बैंक नगरपालिका, विद्युत विभाग, लोक अदालत में उपस्थित रहे। जहां चारों कोर्ट मे 271 मामले आपसी समझाइस के आधार पर निपटे।
सफलता की कहानी-
(न्यायालय श्री सुशील कुमार अग्रवाल जिला न्यायाधीश बुद्वार खण्डपीठ-14)- प्रकरण का संक्षेप इस प्रकार है कि
01-यह कि न्यायालय श्री सुशील कुमार अग्रवाल जिला न्यायाधीश बुढार के यहां लंबित प्रकरण धारा 13 हिन्दू विवाह अधिनियम 1995 अंतर्गत (आर सीएसएचएम) (श्रीमती अलंकृता बनाम आर.नवीन कुमार) में तथ्य यह है कि उभयपक्ष का विवाह हिन्दू विधि से 12.12.2018 को सम्पन्न हुआ परन्तु विवाह के 4 साल बाद उभयपक्ष के मध्य वैचारिक मतभेद होने से उभयपक्ष का एकसाथ रहना कठिन हो गया है। उभयपक्ष के मध्य कई बार नाते रिश्तेदारों द्वारा समझाईश का भी प्रयास किया गया, किन्तु उभयपक्ष का आपस में रहना संभव नहीं हो पाया। उसके पश्चात उत्तरवादी का व्यवहार बिगड़ता चला गया, दोनों पक्षों के मध्य दाम्पत्य जीवन निर्वहन करना मुश्किल हो गया है। तदनुसार याचिकाकर्ता द्वारा उत्तरवादी से वैवाहिक जीवन के न्यायिक प्रथक्करण की आज्ञाप्ति चाही गई। प्रकरण को आज नेशनल लोक अदालत की खण्डपीठ कमांक 14 (श्री सुशील कुमार अग्रवाल जिला न्यायाधीश) के समक्ष रखा गया, तत्सबंध में उपस्थित पक्षों को सुना गया। दोनों पक्षों को समझाईश दी गई जिससे दोनों पक्ष ने खुशी-खुशी राजीनामा कर लिया। एवं आगे कोई भी विवाद न होने की संभावना के साथ साक्ष्य लिया जाकर प्रकरण समाप्त किया गया। दोनों को फूलमाला पहनाकर न्यायाधीश महोदय ने आर्शीवाद दिया और पौधे सुलह के रूप में प्रदाय किया गया।।
इसके अलावा न्यायाधीश आकांक्षा टेकाम के यहां से लीगल एड के अधिवक्ता अरविंद साहनी और न्यायाधीश आकांक्षा टीकम जी की समझाइए दिए जाने पर चल रहे दो केस जिसमें घरेलू हिंसा और भरण पोषण के केस में रुक्मणी चौधरी और उनके पति गंगा चौधरी ने आपसी राजीनामा किया और अब अपने विवाद को खत्म कर फिर से एक दूसरे के हो गए और एक साथ यह वादा किया कि वह दोनों लोग मिलकर भविष्य में वैवाहिक जीवन का पालन करेंगे जिस पर उनके अधिवक्ता अरविंद साहनी द्वारा एक पेड़ आपसी राजी नामा करने के लिए उपहार शुरू प्रदान किया गया। ।
वहीं अंत में न्यायाधीश ऋषभ दीक्षित जी की कोर्ट में जिन-जिन अधिवक्ताओं के केस आपसी राजी नामा के आधार पर प्रकरण का निपटारा किया गया उन सभी अधिवक्ताओं को न्यायाधीश दीक्षित ने एक-एक पेड़ देकर उन्हें धन्यवाद किया ।



