वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
किशनगंज जिले के टेऊसा पंचायत में स्मैक के कथित बढ़ते अवैध कारोबार ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में नशीले पदार्थों का कारोबार तेजी से फैल रहा है और इसकी चपेट में सबसे अधिक युवा आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्मैक की लत के कारण कई परिवार आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संकट से जूझ रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार टेऊसा पंचायत स्थित नरसिंग डागा फार्म हाउस तथा उसके आसपास के इलाके में नशेड़ियों और कथित तस्करों का जमावड़ा लगा रहता है। उनका आरोप है कि खुलेआम नशा किए जाने से क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि किशनगंज सीमावर्ती जिला होने के कारण बाहरी क्षेत्रों से नशीले पदार्थों की तस्करी की आशंका बनी रहती है। उनका आरोप है कि संगठित नेटवर्क के माध्यम से स्मैक की छोटी-छोटी पुड़ियाएं विभिन्न इलाकों तक पहुंचाई जा रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल छोटे स्तर के नशा करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं होगा। उनका मानना है कि पुलिस और संबंधित एजेंसियों को तस्करी के पूरे नेटवर्क, सप्लायरों तथा वित्तीय स्रोतों तक पहुंचकर कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि नशे की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।
युवा सबसे अधिक प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार बड़ी संख्या में युवा स्मैक की लत का शिकार हो चुके हैं। कुछ लोगों का दावा है कि कई ई-रिक्शा (टोटो) चालक भी सार्वजनिक स्थानों पर नशा करते देखे जाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि जिस उम्र में युवाओं को शिक्षा, रोजगार और अपने भविष्य के निर्माण में जुटना चाहिए, उसी उम्र में वे नशे के दलदल में धंसते जा रहे हैं।
महिलाओं और बच्चों में बढ़ी असुरक्षा
स्थानीय लोगों का कहना है कि नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों की बढ़ती गतिविधियों से महिलाओं और बच्चों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। सुबह और शाम कई स्थानों पर नशा करने वालों का जमावड़ा लगने से आम लोगों को आवागमन और दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेष अभियान चलाने की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पुलिस तथा मादक पदार्थ नियंत्रण से जुड़े विभागों से क्षेत्र में विशेष अभियान चलाने की मांग की है। उन्होंने कथित स्मैक सप्लायरों के पूरे नेटवर्क का खुलासा करने, आपूर्ति श्रृंखला को ध्वस्त करने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही नशे के संभावित अड्डों पर नियमित छापेमारी, सघन गश्त और निगरानी बढ़ाने की भी अपील की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई तो नशे का यह कथित कारोबार आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। उनका कहना है कि स्मैक केवल एक नशीला पदार्थ नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, परिवारों की खुशियों और समाज की नींव को खोखला करने वाला घातक ज़हर बनता जा रहा है।
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