“बिहार की राजनीति में”भानुमती का पिटारा”

*बैठकी*
गजब बिहार की राजनीति और नेतागण हैं!! यहां की राजनीति में इमानदारी,सेवा,त्याग, संवैधानिक मान मर्यादा का कोई महत्व हीं नहीं है। राजनीति और जनता दोनों सिर्फ और सिर्फ जाति और धर्म का मानदंड बनाती दिख रही है।–उमाकाका बैठते हीं मुंह बनाये।



काकाजी, महत्व तब होता न,जब जनता को भी अच्छे-बुरे, इमानदार-बेईमान, चरित्रवान-चरित्रहीन, सदाचारी-भ्रष्ट, मूर्ख और ज्ञानी का महत्व और परखने की क्षमता हो। जब लोकतंत्र के नाम पर अशिक्षित, अज्ञानी और  बुद्धिजीवियों को भी  एमएलए,एमपी के चुनाव में अशिक्षित,अपराधी,भ्रष्ट और सनातन द्रोही, राष्ट्रद्रोही में हीं किसी एक का चुनाव करने का हीं ऑप्शन हो, तो वैसे लोकतंत्र का क्या स्तर होगा!! ये सोचने की बात है। हमारे बिहार पर तो ये सौ प्रतिशत लागू होता है।–मास्टर साहब हाथ चमकाये।

हमारे देश में लोकतंत्र के स्वरूप को देखना है तो चुनाव के समय राजनीतिक दलों द्वारा की गई घोषणाओं की समीक्षा कर लिजिये! झूठी और फर्जी घोषणा, बेहिचक करने की स्वतंत्रता है ताकि जनता को लालच में फंसाकर सत्ता हासिल किया जा सके। ऐसा किया भी गया जैसे विगत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का महिलाओं को खटाखट 8500 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा। जिसने कांग्रेस को 52 सीटों से बढ़ाकर 99 सीटों पर ला खड़ा किया। राज्य चुनाव में हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस  और पंजाब में केजरीवाल की आप पार्टी के वादे!बरसों बीतने के बावजूद चुनावी वादें बस वादें हीं रह गये हैं और जनता अपने को ठगा महसूस कर रही है। लेकिन हमारे लोकतंत्र की खुबसूरती देखिये कि ये झूठे वादे कानून की निगाह में और नैतिकता की दृष्टि से,ठगी या अपराध की श्रेणी में नहीं आते है और न हीं सुप्रीम कोर्ट को इसमें “संवैधानिक खतरा” नजर आता है। सुप्रीम कोर्ट को, भारत के लोकतांत्रिक चुनाव को साफ सुथरा और मजबूती के लिए,चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर कराने के विरुद्ध दायर याचिकाओं को निरस्त करने में संविधान खतरे में नजर आने लगता है।–कुंवरजी अखबार पलटते हुए।

सरजी, बिहार में तो विपक्षी गठबंधन ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है और नाम दिया गया है–“तेजस्वी प्रण”। मतलब इंडी गठबंधन के बाकी सहयोगी,नेपथ्य में चले गये, खासकर कांग्रेस। भले हीं राहुल गांधी और तेजस्वी कल बिहार में एक साथ सभा किये लेकिन विपक्षी गठबंधन के नाम पर पेबंद साटने की तरह हीं लगा।–सुरेंद्र भाई बोल पड़े।

इसबीच बेटी चाय का ट्रे रख गई और हमसभी एक एक कप उठाकर पुनः वार्ता में……..

छोड़ीं, पहिले इ बतायीं जा जे इंडी गठबंधन के घोषणापत्र “तेजस्वी प्रण” में का का प्रण,लिहल बा!!–मुखियाजी खैनी मलते हुए।

मुखियाजी,इंडी गठबंधन ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया है कि सरकार बनने के 20 दिनों के भीतर कानून बनायेंगे और हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देंगे। हर परिवार को 200 यूनिट,फ्री बिजली देंगे। हर व्यक्ति को 25 लाख का फ्री हेल्थ इंश्योरेंस देंगे।राज्य की हर महिला को दिसम्बर से 2500 रुपये देंगे। जीविका दीदीयों को स्थायी कर देंगे। कांट्रैक्ट और आउट सोर्सिंग के कर्मचारियों को स्थायी कर देंगे। विधवा और बुजुर्गो का पेंशन  बढ़ाकर 1500 रुपये कर देंगे जिसमें हर साल 200 रुपयों की वृद्धि होती रहेगी। राज्य के भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन का मालिकाना हक दिया जायेगा। स्नातकों और स्नातकोत्तरों को हर महिने क्रमशः 2 हजार और 3 हजार बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा। पुरानी पेंशन स्कीम को लागू किया जायेगा। वक्फ संशोधन कानून को बिहार में लागू नहीं किया जायेगा।उसे फाड़कर फेंक दिया जायेगा। किसानों को एमएसपी पर गारंटी दी जायेगी। बिहार में मंडी सिस्टम को फिर से लागू कर दिया जायेगा। आरक्षण के 50 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाने का कानून पास किया जायेगा, जिसे लागू करने के लिए केंद्र के पास भेजा जायेगा। पंचायत और नगर परिषद में पिछड़े वर्ग को मिलने वाले 20 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया जायेगा।
इस तरह इंडी गठबंधन ने अपने मेनिफेस्टो में 25 बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर दी है।–डा.पिंटु ने विवरण हीं रख दिया।

गजब! गजब! ये तो “लालू सन तेजस्वी, एण्ड हिज एलायंस” ने भानुमती का पिटारा हीं खोल दिया है। लेकिन डा. साहब कोई उससे पुछने वाला नहीं है क्या कि बेटा, पिटारा तो खोल दिया लेकिन इन घोषणाओं को पुरा करने को रुपये कहां से लाओगे!! पेड़ पर तोड़ोगे क्या!! अगर ऐसा पेड़ तुम्हारे पास था हीं तो क्या जरूरत थी तुम्हारे बाप को घोटाला दर घोटाला करने की!!–उमाकाका बुरा सा मुंह बनाये।

एगो बात ना बुझाइल!जब हर परिवार के सरकारी नौकरी मिलिये जायी त बेरोजगारी भत्ता कइसन! बेरोजगारे कहां रही जइहें!! एकरा माने इ घोषणापत्र में खाली झोल भरल बा।–मुखियाजी सही कहे।

मुखियाजी, तेजस्वी से पत्रकार से लेकर एनडीए के नेता लोग भी पुछ रहे हैं कि जब बिहार का वर्तमान बजट हीं कुल करीब 3 लाख 17 हजार करोड़ का है तो इंडी गठबंधन के घोषणापत्र में किये गये वादे के अनुसार करीब 13-14 लाख करोड़ कहां से आयेगा!! जनता को बेवकूफ बनाया जा रहा है। तो तेजस्वी बोला कि सब अध्ययन कर लिया गया है,ब्लू प्रिंट तैयार है लेकिन अभी नहीं बतायेंगे!!–डा. पिंटू मुंह बनाये।

डा. साहब, तेजस्वी के ऐसा कहने का मतलब बहुत गुढ़ है। पैसा कहां से आयेगा!! तेजस्वी यादव बता भी नहीं सकता, मजबूरी है। इसे सिर्फ मैं जानता हूॅं।–मास्टर साहब बोले।

तनी हमनियो के बतायीं मास्टर साहब!–मुखियाजी उत्सुक लगे।

मतलब बहुत गुप्त है जिसे समय से पहले नहीं बताया जा सकता। वैसे मैं बता देता हूॅं–हिंदूओं में यादव वंश गौ पालक और गौ सेवक माने जाते हैं। तो देवताओं के राजा इन्द्र भगवान की, इंडी गठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव से बात हो चूकी है। इन्द्र भगवान ने तेजस्वी को आश्वासन दे दिया है कि चुनाव जीतने के उपरांत देवताओं की गाय “कामधेनु” तेजस्वी यादव को सौंप दी जायेगी जिससे बिहारी जनता से किये गये अपने सारे वादों को सरलता से इंडी गठबंधन पुरा कर देगा।–कहकर मास्टर साहब हंस दिये।

मुखियाजी, मुझे तो डर है कि इंडी गठबंधन के बिहार में सत्ता में आने के साथ हीं बिहार, भारत से अलग हो जायेगा।–उमाकाका हाथ चमकाये।

इ बेकार के बात काहे कहतानी!–मुखियाजी पुछ बैठे।

तभी तो तेजस्वी अपने भाषण में कह रहा है कि केंद्र सरकार द्वारा “वक्फ संशोधन बिल” को बिहार में लागू नहीं होने देंगे।उसे फाड़कर कचरे के डब्बे में फेंक देंगे।
भला बताइये! संवैधानिक कानून को कचरे में तभी न फेंका जा सकता है!जब वो देश से अलग हस्ती रखता हो!! मुस्लिम तुष्टीकरण का ऐसा नमुना और कहीं नहीं दिखेगा जो बिहार में दिख रहा है। इस बात का उल्लेख ओवैसी ने भी अपने रैलियों में मुसलमानों को संबोधित करते हुए कहा है।–उमाकाका मुंह बनाये।

कल दरभंगा और मुजफ्फरपुर की रेलियों में राहुल गांधी भी महिनों बाद बिहार पधारे और हमेशा की तरह वोट चोरी,मोदी, अंबानी,अडानी पर निशाना साधा।इसी क्रम में हमेशा की तरह, हिंदू विरोधी मानसिकता से भरा राहुल,हिंदुओं के छठ पर्व को लेकर भी काॅमेंट किया जिसको लेकर उनकी काफी आलोचना हो रही है।–कुंवरजी अखबार रखते हुए।

कुछ भी कहिये! बिहार के चुनाव को भले हीं विकास और फ्री फ्री की राजनीति कुछ प्रभावित करे लेकिन सच्चाई है कि बिहार का चुनाव पूर्णतः जातिवादी एवं तुष्टीकरण की राजनीति पर आधारित रहा है और रहेगी। बिहार में इंडी गठबंधन के कोर वोटर 18 प्रतिशत मुस्लिम और 14 प्रतिशत यादव रहे हैं। पिछड़ों और मुस्लिम वोटरों को ध्यान में रखते हुए हीं इंडी गठबंधन ने उम्मीदवारों का चयन किया है। यही स्थिति एनडीए के उम्मीदवार चयन में भी दिखता है। इसमें अपराधिक पृष्ठभूमि के दबंग उम्मीदवारों को भी अनदेखा नहीं किया गया है।
खैर देखिये, आने वाले समय में बिहारी जनता मोदी,योगी, नितीश के विकास के माॅडल पर विश्वास करती है या इंडी गठबंधन के भानुमती के पिटारे पर!! अच्छा अब चला जाय।–कहकर डा.साहब उठ गये और इसके साथ हीं बैठकी भी……!!!!
प्रोफेसर राजेंद्र पाठक (समाजशास्त्री)

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