दैनिक समाज जागरण | 05.05.2026
चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ), पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर
जमशेदपुर। समाजवादी चिंतक एवं अधिवक्ता सुधीर Kumar पप्पू ने पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक परिदृश्य पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस की हार और भारतीय जनता पार्टी की जीत का श्रेय उत्तर भारतीयों की एकजुटता को दिया है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम केवल राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे कथित भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ जनता की भावना का स्पष्ट संकेत है।
सुधीर कुमार पप्पू ने आरोप लगाया कि वर्ष 1977 के बाद पश्चिम बंगाल में सत्ता में रही सरकारों, चाहे वह वाम मोर्चा हो या तृणमूल कांग्रेस, ने उत्तर भारतीयों के साथ दोहरे मापदंड का व्यवहार किया। उनके अनुसार उत्तर भारतीयों को “बाहरी”, “शोषक” और “अत्याचारी” के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई, जिससे सामाजिक विभाजन को बढ़ावा मिला।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के औद्योगिकीकरण और आर्थिक विकास में उत्तर भारतीयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार व्यापार और पूंजी निर्माण के क्षेत्र में हरियाणा और राजस्थान के लोगों का बड़ा योगदान रहा, जबकि बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों ने श्रम एवं मानव संसाधन के रूप में राज्य की प्रगति में अहम भूमिका निभाई। इसके बावजूद उन्हें उपेक्षा और भेदभाव का सामना करना पड़ा।
अधिवक्ता पप्पू ने कहा कि पश्चिम बंगाल में उत्तर भारतीयों की कई पीढ़ियां बस चुकी हैं और वे राज्य की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें “बाहरी” बताने की कोशिश की गई, जो सामाजिक समरसता के लिए नुकसानदायक है।
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जहां उत्तर भारतीयों को बाहरी बताया गया, वहीं बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई गई। उन्होंने इसे सरकार की “चयनात्मक दृष्टि” बताते हुए कहा कि इससे आम जनता में असंतोष बढ़ा।
सुधीर कुमार पप्पू ने कहा कि उत्तर भारतीयों की एकता ने इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई और कथित क्षेत्रवाद तथा “बांग्ला राष्ट्रवाद” के प्रभाव को समाप्त कर दिया। उनके अनुसार यह चुनाव परिणाम उन राजनीतिक दलों के लिए संदेश है, जो क्षेत्रीयता की राजनीति के जरिए देश की एकता और अखंडता को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, जहां विभिन्न भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं मिलकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाती हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का क्षेत्रीय भेदभाव संविधान की भावना के विपरीत है।
अंत में उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में सभी राजनीतिक दल इस परिणाम से सीख लेते हुए समावेशी राजनीति को बढ़ावा देंगे, ताकि प्रत्येक नागरिक को समान सम्मान और अवसर मिल सके।



