दैनिक समाज जागरण | 05.05.2026
चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ), पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर
जमशेदपुर। वर्ष 2013 में उपायुक्त कार्यालय परिसर में जन समस्याओं को लेकर हुए धरना-प्रदर्शन और हंगामे के चर्चित मामले में मंगलवार को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में पूर्व जिला पार्षद एवं पूर्व झामुमो नेता किशोर यादव सहित राहुल सिंह, धनंजय सिंह, डी.एन. सिंह और आर.बी. सरन को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 4 जनवरी 2013 को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सैकड़ों कार्यकर्ता विभिन्न जन समस्याओं को लेकर उपायुक्त कार्यालय परिसर में धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान कथित रूप से हंगामे की घटना हुई थी। मामले को लेकर उपायुक्त कार्यालय के लिपिक अलखेन खलको द्वारा बिष्टुपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 142 (अवैध जमाव), 149 (सामूहिक दायित्व), 341 (रास्ता रोकना) और 504 (जानबूझकर अपमान कर शांति भंग करना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले की सुनवाई लंबे समय तक अदालत में चली। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल तीन गवाह पेश किए गए, लेकिन अदालत ने पाया कि प्रस्तुत गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। गवाहों के बयानों में स्पष्टता और ठोस प्रमाणों का अभाव पाया गया, जिससे अभियोजन पक्ष अपना मामला मजबूत तरीके से साबित नहीं कर सका।
वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू, बविता जैन, धर्मेंद्र सिंह निकू और दीपा सिंह ने प्रभावी ढंग से अपनी दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं है तथा उन्हें गलत तरीके से मामले में फंसाया गया है।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में असफल रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य आवश्यक होते हैं, जो इस मामले में प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसी आधार पर सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
अदालत के फैसले के बाद आरोपियों और उनके समर्थकों में राहत और संतोष का माहौल देखा गया। इसे न्याय की जीत बताते हुए समर्थकों ने खुशी जताई। लंबे समय से लंबित इस मामले के निपटारे के साथ ही एक पुराने विवाद का अंत हो गया।
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