समाज जागरण/ अनिल कुमार अग्रहरी
ओबरा/सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी स्थित श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स खदान में हुई हृदय विदारक दुर्घटना के बाद, ओबरा तापीय विद्युत परियोजना स्थित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के सदस्यों ने राहत एवं बचाव कार्य में अपनी अहम और त्वरित भूमिका निभाकर एक बार फिर कर्तव्यनिष्ठा का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है।
यह दुखद घटना कंप्रेसर कार्य के दौरान हुई, जब पत्थर के दरकने से खदान के ऊपरी हिस्से से भारी मात्रा में मलबा गिर गया, जिसके नीचे कई कामगार दब गए। स्थानीय प्रशासन से सूचना मिलते ही, सीआईएसएफ के कमांडेंट सतीश कुमार सिंह ने तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने अपनी अग्नि शाखा के 1 फायर टेंडर, अधिकृत क्रू मेंबर्स और सुरक्षा बल के सदस्यों के साथ तुरंत घटनास्थल के लिए प्रस्थान किया। सीआईएसएफ टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर सबसे पहले राहत एवं बचाव कार्य की शुरुआत की। उनकी तत्परता के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे। घोर अंधेरे वाली खदान में राहत एवं बचाव कार्य के लिए पर्याप्त प्रकाश की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जो रात के समय ऑपरेशन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थी।राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमों के घटनास्थल पर पहुंचने के उपरांत भी, सीआईएसएफ के बल सदस्य उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लगातार सक्रिय रहे। राहत एवं बचाव कार्य में लगी सभी एजेंसियों के लिए समुचित भोजन पैकेजिंग और जरूरत के सभी आवश्यक सामान तुरंत मुहैया कराए गए। हादसे में पीड़ित परिवारों को लगातार सांत्वना दिलाते हुए, सीआईएसएफ ने अपनी संवेदनशील छवि को भी मजबूत किया। सीआईएसएफ द्वारा की गई इस सराहनीय कार्रवाई और तत्परता ने एक बार फिर उनके आदर्श वाक्य सुरक्षा एवं संरक्षण को आत्मसात करते हुए यह साबित कर दिया है कि सीआईएसएफ के बल सदस्य सदैव कर्तव्यनिष्ठा एवं संवेदनशीलता के साथ न केवल भारत के उद्यम एवं धरोहर की सुरक्षा करते हैं, बल्कि देश के आम नागरिकों की सुरक्षा के प्रहरी भी बने रहेंगे। आपदा के इस कठिन समय में सीआईएसएफ की यह त्वरित और निर्णायक भूमिका निःसंदेह सराहनीय है और यह दर्शाती है कि सुरक्षा बल अपनी तैनाती क्षेत्र से बाहर भी जनसेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।



