वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
किशनगंज नगर परिषद स्थित वार्ड संख्या-01 के पार्षद जमशेद आलम से जुड़े कथित जाति प्रमाण पत्र विवाद को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पार्षद पर आरोप है कि उन्होंने पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित होने के बावजूद स्वयं को अति पिछड़ा वर्ग (EBC) श्रेणी में दर्शाते हुए चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुए। इसके अलावा, पद के दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने संज्ञान लिया है। आयोग के संयुक्त निर्वाचन आयुक्त द्वारा जारी पत्र (संख्या 50-85/2023-1147, दिनांक 13 मार्च 2026) के माध्यम से जिला पदाधिकारी, किशनगंज को निर्देश दिया गया है कि मामले की जांच वरीय पदाधिकारी से कराकर विस्तृत जांच प्रतिवेदन आयोग को उपलब्ध कराया जाए।
शिकायतकर्ता, सीमांचल सेवा फाउंडेशन के संस्थापक सह राष्ट्रीय आरटीआई कार्यकर्ता हसीबुर रहमान ने आरोप लगाया है कि नामांकन के दौरान शपथ पत्र में जाति से संबंधित तथ्यों को छिपाया गया है। उन्होंने निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित अभिलेखों की गहन समीक्षा की जाएगी तथा जाति प्रमाण पत्र की वैधता की पुष्टि सक्षम प्राधिकारी से कराई जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच पूर्ण होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और आरक्षण व्यवस्था की विश्वसनीयता से भी जुड़ा माना जा रहा है।
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