हड्डियों में दर्द को न करें नज़रअंदाज, यह ‘हड्डी का टीबी’ भी हो सकता है

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
टीबी (तपेदिक) आज भी दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक है, जो समय पर पहचान और इलाज न होने पर गंभीर रूप ले सकती है। भारत सरकार वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य लेकर चल रही है, और इसी कड़ी में किशनगंज जिला स्वास्थ्य विभाग लगातार जनजागरूकता, उपचार और सहायता योजनाओं को प्राथमिकता दे रहा है। टीबी केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हड्डियों और जोड़ों को भी अपनी चपेट में ले सकती है। हड्डियों में लगातार दर्द, सूजन या असामान्य बदलाव को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह हड्डी का टीबी हो सकता है, जो विकलांगता तक पहुंचा सकता है।
यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि हड्डी का टीबी अधिकतर कूल्हे, घुटने, रीढ़, कोहनी और टखनों जैसे बड़े जोड़ों को प्रभावित करता है। शुरुआती दौर में यह हल्के दर्द या सूजन के रूप में दिखाई देता है, लेकिन धीरे-धीरे यह दर्द बढ़ता है और प्रभावित जोड़ों में कठोरता या विकृति आ सकती है। उन्होंने कहा कि यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होती है, जो शरीर में पहले से मौजूद संक्रमण के पुनः सक्रिय होने पर हड्डियों तक फैल सकता है। समय रहते इलाज न मिलने पर यह स्थिति गंभीर हो जाती है और मरीज को चलने-फिरने में कठिनाई होने लगती है।यदि समय पर पहचान हो जाए, तो दवाओं से यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है, लेकिन देर से पहचान होने पर कई बार सर्जरी ही एकमात्र विकल्प रह जाता है।

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि टीबी मरीजों के इलाज के दौरान उचित पोषण बेहद जरूरी है, ताकि उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे। इस दिशा में “निक्षय पोषण योजना” बहुत कारगर साबित हो रही है। योजना के तहत प्रत्येक मरीज को इलाज की अवधि के दौरान प्रतिमाह एक हजार रुपए की सहायता राशि सीधे बैंक खाते में दी जाती है। यह सहायता राशि आठ महीने तक दी जाती है।उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत निजी चिकित्सकों को मरीज की सूचना देने और इलाज पूरा होने पर पांच -पांच सौ रूपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वहीं ट्रीटमेंट सपोर्टर को भी मरीज के छह माह में ठीक हो जाने पर एक हजार रुपए और मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) मरीज के ठीक होने पर पांच हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि मिलती है। यदि कोई आम नागरिक टीबी के संदिग्ध मरीज को अस्पताल लाता है और जांच में बीमारी की पुष्टि होती है, तो उसे भी पांच सौ रुपए प्रदान किए जाते हैं।यह योजना न केवल मरीजों को आर्थिक सहारा देती है, बल्कि उन्हें इलाज के प्रति नियमित और जिम्मेदार भी बनाती है।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है की हड्डियों में लगातार दर्द,सूजन या असामान्य बदलाव को अनदेखा न करें तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल में जांच कराएं।

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