रुपईडीहा कस्बे में कई अवैध स्टैंडों से चल रहे है डग्गामार वाहन

परिवाहन विभाग को प्रतिदिन लगा रहे हैं लाखों का चूना

बहराइच। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जिलों के सभी अधिकारियों को अवैध स्टैंड व डग्गामार वाहनों को तत्काल हटाकर कार्रवाई करने का आदेश जारी किया था। लेकिन भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में अधिकारी उनके आदेशों की धज्जियां उड़ा रहे है। मुख्यमंत्री के आदेश का पालन कुछ दिन पूर्व जिला प्रशासन ने रुपईडीहा कस्बे से अवैध वाहन स्टैंडों पर कार्रवाई करते हुए हटवा दिया था। तथा कई डग्गामार वाहनों को सीज भी किया था। जिससे यहां पर विभिन्न अवैध स्टैंड संचालकों में हड़कंप मच गया था। रुपईडीहा कस्बे में विभिन्न स्थानों पर भारी संख्या में खड़े बस , डबल डेकर बस , ट्रेवलर्स मिनी बसों आदि वाहनों के संचालकों ने अपने अपने स्टैंडों से इन वाहनों को हटा दिया था। परन्तु एक सप्ताह भी नहीं बीता फिर इन अवैध स्टैंडों से डग्गामार वाहनों का संचालन शुरू हो गया। बताया जाता है कि भारत नेपाल सीमावर्ती रुपईडीहा कस्बे में कई स्थानों से डग्गामार वाहनों का संचालन पहले दिन के उजाले में हों रहा था। जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के बाद से अब इन वाहनों का संचालन देर शाम से लेकर देर रात तक शुरू रहता है। इन वाहनों में नेपाली यात्रियों को भूसों की तरह भरा जा रहा है। और इन भोले भाले नेपाली यात्रियों से अधिक किराया भी वसूल किया जा रहा है। रुपईडीहा कस्बे के राना पिट्रोल पम्प के निकट दो स्थानों से , चकिया रोड पर स्थित ईदगाह के सामने पुराने ईंट भट्टा पर से बस , डबल डेकर बसों का संचालन किया जा रहा है। इसी प्रकार सीमांत डिग्री कॉलेज के निकट दर्जनों से अधिक प्रतिदिन ट्रेवलर्स मिनी बसों का संचालन किया जा रहा है। स्टैंड संचालक इन वाहनों से अच्छा खासा कमीशन ले रहे हैं। एक ट्रेवलर्स मिनी बस से 3 हजार से लेकर 5 हजार रुपए तक कमीशन वसूला जा रहा है। इन बसों के संचालकों द्वारा नेपाली यात्रियों को अपने जाल में फंसाने के लिए नेपाली भाषा बोलने वाले रिक्शा , आटो रिक्शा चालकों को दलाल के रूप में लगा रखा है। इन नेपाली यात्रियों को नेपाल से लाने पर इन दलालों को प्रत्येक यात्री पर अच्छी खासी कमीशन दी जा रही है। सुबह से लेकर शाम तक नेपाली यात्रियों को दलालों के माध्यम से एक स्थान पर इकठ्ठा किया जाता है। और शाम होते ही बस , डबल डेकर बसों व ट्रेवलर्स मिनी बसों का संचालन शुरू हो जाता है। सूत्र बताते हैं। कि ट्रेवलर्स मिनी बस में 26 यात्रियों के स्थान पर 35 से 40 नेपाली यात्रियों को भूसों की तरह भरकर बैठा दिया जाता है। इस संबंध में ट्रेवलर्स मिनी बस के एक कर्मचारी ने बताया कि रुपईडीहा से ऋषिकेश का किराया एक यात्री का 1800 रुपए लिया जा रहा हैं। जबकि स्टैंड संचालन करने वालो को 18 प्रतिशत कमीशन देना पड़ता है। रुपईडीहा कस्बे के विभिन्न स्थानों से चल रही डग्गामार डबल डेकर बस , बस व ट्रेवलर्स मिनी बसों के बढ़ते वर्चस्व के चलते रोडवेज बसों को प्रतिदिन लाखों रुपयों का चूना लगाया जा रहा है। लेकिन इन अवैध डग्गामार बसों आदि डग्गामार वाहनों के संचालक को रोकने के लिए संबंधित जिम्मेदार अफसर इन अवैध डग्गामार बसों व मिनी बसों‌‌ तथा आदि डग्गामार वाहनों का संचालन बंद कराने के बजाय करोड़ों रुपये की सालाना अवैध वसूली में मशगूल है। इन अवैध डग्गामार वाहनों के बढ़ते संचालन से जहां परिवहन परिवहन निगम के अधिकारी व कर्मचारी इन डग्गामार बसों , मिनी बसों आदि अवैध गाड़ियां के संबंध में स्थानीय पुलिस व संबंधित अधिकारियों को कई बार प्रार्थना पत्र भी दे चुके हैं। परन्तु खाऊं कमाऊ नीत के चलते आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। यात्रा के दौरान तमाम जलालत झेल रही नेपाली यात्री व अन्य सवारियां अब सूबे की भाजपा सरकार को कोसने लगी है। बताया जाता है कि जिन प्रमुख मार्गो पर रोडवेज बसों के संचालन की अनुमति प्रदेश सरकार ने दी है। उन रूट पर सरकार ने प्राइवेट वाहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन भारत नेपाल सीमा क्षेत्र से सटे रुपईडीहा कस्बे में काफी दिनों से कई स्थानों पर अस्थाई बस स्टैंड बना यह डग्गामार वाहन दिल्ली , हरिद्वार , शिमला ऋषिकेश , मुम्बई , हरियाणा , पंजाब , महाराष्ट्र के कई महानगरों आदि‌ महानगरों के लिए चलवाई जा रही है। इन नेपाली यात्रियों को रोडवेज बस स्टेशन पहुंचने से पहले ही रास्ते में ही दलालों द्वारा रोक कर इन डग्गामार बसों व मिनी बसों आदि वाहनों पर बैठा दिया जाता है। इन मार्गों पर रोडवेज बसों के संचालन के अनुमति के बाद पुलिस , एआरटीओ , यातायात के जिम्मेदारों के लूट घसोट के चलते इस प्रतिबंधित रूट पर भी कई दर्जन से अधिक डग्गामार डबल डेकर बस , बस , मिनी बसें आदि डग्गामार वाहन चल रहे है। सूत्रों की माने तो इन प्राइवेट वाहनों से थाना चौकी यातायात पुलिस संबंधित अधिकारी हर वाहन से एक मोटी रकम माहवारी के रूप में बंधी हुई है। गौरतलब है कि यदि इन डग्गामार बसों के अवैध वसूली को ही देखा जाए तो इस मार्ग पर संबंधित अधिकारियों को लाखों रुपए से ज्यादा की रकम हर माह इन सबके बीच बंदरबांट हो रहा है। लेकिन वहीं सरकार के परिवहन विभाग को लाखों रुपए का चूना हर माह लग रहा है। कई बार यह डग्गामार वाहन मार्ग दुर्घटना के शिकार भी हो चुके हैं। जिनमें कई नेपाली यात्रियों की मौत भी हो चुकी है। रुपईडीहा कस्बे में रोडवेज बस स्टेशन होने के बावजूद कस्बे के अंदर से ही अवैध डग्गामार वाहन चलाये जाने के संबंध में जब एआरटीओ प्ररिवर्तन ओपी सिंह से‌ पूछा गया तो उन्होंने बताया कि रुपईडीहा में रोडवेज बस स्टेशन तो है पर अभी तक डिपो का दर्जा प्राप्त नहीं है। इस लिए रुपईडीहा कस्बे से परिमिट वाली गाड़ियां चल सकती है। रुपईडीहा से डग्गामार वाहनों में नेपाली यात्रियों को भूसों की तरह भरा जा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि अधिक सवारियां बैठाने पर अभी तक 20-25 गाड़ियों को सीज किया गया है। इन अवैध रूप से चल रहे वाहनों की प्रतिदिन जांच की जा रही है।