दैनिक समाज जागरण 29.05.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर
जादूगोड़ा झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन ने शुक्रवार को संतोष गंगवार से राजभवन में शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल को अपने हाथों से बनाई गई एक चित्रकला भेंट कर सम्मान प्रकट किया। लगभग 20 मिनट तक चली इस मुलाकात में दुखनी सोरेन ने पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा, पोटका, घाटशिला और बहड़ागोड़ा क्षेत्र में रहने वाली विलुप्तप्राय सबर जनजाति की बदहाल स्थिति को प्रमुखता से उठाया।
दुखनी सोरेन ने राज्यपाल को बताया कि सबर जनजाति के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें जानबूझकर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार उपेक्षा और संसाधनों की कमी के कारण इस जनजाति की आबादी दिनों-दिन घटती जा रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने राज्यपाल से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने और प्रभावी पहल करने का आग्रह किया।
मुलाकात के दौरान राज्यपाल संतोष गंगवार ने भी सबर जनजाति की घटती जनसंख्या को लेकर चिंता व्यक्त की और इसके कारणों को जानने की कोशिश की। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना तथा सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
दुखनी सोरेन ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में झारखंड के आदिवासी और मूलवासी समाज से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ-साथ स्थानीय नीति को प्रभावी तरीके से लागू करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि झारखंड के सभी विकास कार्यों, सरकारी टेंडरों और रोजगार के अवसरों में स्थानीय आदिवासी-मूलवासी युवाओं को प्राथमिकता दी जाए।
ज्ञापन में ग्राम सभा और ग्राम प्रधान को संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप अधिक शक्तियां देने की भी मांग की गई। दुखनी सोरेन ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। खासकर कोल्हान क्षेत्र के दूरदराज गांवों में रहने वाले लोगों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने इन क्षेत्रों में विशेष विकास योजना लागू करने की आवश्यकता बताई।
इसके अलावा उन्होंने आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण के लिए अलग से विशेष नीति बनाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और विस्थापन के कारण आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां अपनी परंपराओं और संस्कृति से दूर हो जाएंगी।
दुखनी सोरेन ने खनन प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं का मुद्दा भी राज्यपाल के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के कारण बड़ी संख्या में आदिवासी परिवार विस्थापित हुए हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त पुनर्वास और रोजगार नहीं मिल पाया है। उन्होंने विस्थापन, बेरोजगारी और खनन प्रभावित गांवों की समस्याओं पर विशेष ध्यान देने की मांग की।
ज्ञापन में पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून को प्रभावी रूप से लागू करने का भी आग्रह किया गया। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा आदिवासी समाज को दिए गए अधिकारों का पूरी तरह पालन होना चाहिए, ताकि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन की व्यवस्था मजबूत हो सके।
राज्यपाल से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल में शंकर मुंडा, विकास कुमार भक्त और आसित कुमार मंडल भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से झारखंड के आदिवासी समाज के हित में ठोस और दीर्घकालिक पहल करने की मांग की।



