समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी।
मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए मजदूर विरोधी बदलावों और नए कानून ‘वीबी-जी राम जी, के विरोध में युवा गांधीवादियों की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ आज शनिवार को हरहुआ ब्लाक के पलहीपट्टी चौराहे से होते हुए प्रेमनगर से पुआरी कला पहुँची जहाँ स्थानीय लोगों ने यात्रा का स्वागत किया।
गांधीवादी युवाओं ने गाँव-गाँव पहुंचकर मजदूरों को मनरेगा की बहाली के लिए संगठित किया व नये क़ानून ‘वीबी-जी रामजी’ के मज़दूर विरोधी प्रावधानों और काम के संवैधानिक अधिकार पर किये जा रहे सुनियोजित हमले के प्रयासों से भी अवगत कराया।
17 जनवरी को चौरी-चौरा (गोरखपुर) से प्रारंभ हुई “मनरेगा बचाओ साइकिल” यात्रा जो गोरखपुर, देवरिया, बलिया, मऊ, ग़ाज़ीपुर होते हुए बनारस पहुंची जो ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूक करते हुए 17 फ़रवरी को भारत माता मंदिर से निकलकर कचहरी स्थित अम्बेडकर प्रतिमा पर यात्रा का एक दिवसीय उपवास के साथ समापन होगा।
पुआरी कला में आयोजित सभा में यात्री विवेक ने कहा कि सरकार “वीबी-जी रामजी” मजदूर विरोधी कानून लाकर मनरेगा जैसे जनकल्याणकारी क़ानून को ख़त्म कर रही है। इससे गरीब, पिछड़े वर्ग, दलित, भूमिहीन मजदूर और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होंगी और गांवों में पलायन भी बढ़ेगा।
यात्री मुरारी ने कहा कि मनरेगा क़ानून लागू होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं को काम मिला इससे आर्थिक और सामाजिक रूप से महिलाएँ सुदृढ़ हो रही थीं और उनकी सौदा शक्ति में भी इज़ाफ़ा हुआ। मोदी सरकार द्वारा उनके रोज़गार पर हमले के बाद अब वे महिलाएँ फिर से घरों में क़ैद हो जाएंगी।
यात्री प्रियेश ने कहा कि मोदी सरकार पूँजीपतियों के लाखों करोड़ों रुपये के कर्ज माफ़ कर रही है और कौड़ियों के भाव अडानी को देश की सरकारी संपत्तियां नीलाम कर रही है, उसी कड़ी में यह मज़दूर विरोधी सरकार मनरेगा को ख़त्म करके कॉर्पोरेट को सस्ता श्रम उपलब्ध कराने का रास्ता खोल रही है। यात्रा के दौरान सभी यात्री नए क़ानून के आने के बाद मनरेगा मजदूरों के मन में पैदा हुई अनिश्चितताओं और आशंकाओं को लगातार संकलित कर रहे हैं जिसे यात्रा के बाद सरकार को पूर्वांचल के मज़दूरों के मन में अपनी रोज़ी रोटी की सुरक्षा को लेकर व्याप्त भय से अवगत करायेंगे।
जगह -जगह गांधीवादी युवाओं को मनरेगा से जुड़े श्रमिक व ग्रामीणों ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
यात्रा में प्रमुख रूप से काम के संवैधानिक अधिकार को बहाल किया जाए,मजदूर विरोधी कानून वीबी-जी रामजी को तुरंत वापस लिया जाए और
मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की जाए की जोरदार अपील किया गया।
यात्रा में प्रमुख रूप से मृत्युंजय मौर्या, सतीश साहनी, प्रवीण वर्मा, राहुल पवारा (महाराष्ट्र), अमन यादव, करण चौरसिया(झारखंड, प्रियेश, रजत, विवेक मिश्र, नीरज कुमार, दीपक, विवेक यादव (मध्य प्रदेश), नजम शमीम, तौहीद बेग, सूफी सलीम, सुमन आनंद, गौरव पुरोहित (पश्चिम बंगाल), बृजेश साहनी, गौरव पांडेय, संगम गुप्ता, राशिद शेख (बेगूसराय), राजू कुमार (सहरसा), मुरारी कुमार (मुजफ्फरपुर), डॉ शैलेंद्र कुमार (नवादा), निर्भय अहिरवार (मध्य प्रदेश) शामिल हैं।
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