“गौमाता केवल पशु नहीं, भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं” — जलालाबाद व मुरादनगर में गौकशी घटनाओं से मचा हाहाकार, हिंदू संगठनों ने मांगी कठोर कार्रवाई*
*“मेरे देश की धरती” की वही मिट्टी आज लहूलुहान — जलालाबाद की पवित्र भूमि पर गौमाता की हत्या ने झकझोरा जनमानस*
रिपोर्ट : रविंद्र आर्य | मुरादनगर
उत्तर प्रदेश के मुरादनगर क्षेत्र से लेकर ग़ाज़ियाबाद के जलालाबाद गांव तक एक के बाद एक गौकशी की घटनाओं ने लोगों के भीतर आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। मंगलवार सुबह जलालाबाद गांव के गन्ने के खेत में 10 मवेशियों के कटे अवशेष मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। देखते ही देखते ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी और प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुँचीं। फॉरेंसिक टीम को भी जांच के लिए बुलाया गया। गन्ने के खेतों में बिखरे अवशेष देखकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा — ग्रामीणों ने एडीसीपी की गाड़ी के आगे बैठकर रास्ता रोक दिया और नारे लगाते हुए कहा,
*“गोकशी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, यह हमारी आस्था पर हमला है।”*
⚫ गन्ने के खेत में अमानवीय दृश्य, ग्रामीण सन्न
स्थानीय ग्रामीण सुनील कुमार ने बताया कि जब वह खेत में गन्ना काटने पहुँचे, तो वहां गोकशी के बाद फेंके गए अवशेषों का अमानवीय दृश्य देखकर सन्न रह गए। थोड़ी ही देर में सैकड़ों ग्रामीण घटनास्थल पर पहुँच गए।
और भी दर्दनाक तथ्य यह सामने आया कि कटे हुए दस गौवंशों में से दो गौमाताएं गर्भवती थीं। कसाइयों ने यह भी नहीं सोचा कि वे प्रसव के निकट थीं — उन निर्दयी दरिंदों ने गर्भस्थ बछड़ों तक को नहीं छोड़ा।
गांववालों के अनुसार, घटनास्थल पर दोनों गायों के गर्भ से निकले दो नवजात बछड़ों के अवशेष भी पाए गए, जिन्हें देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
इन अवशेषों को लेकर हिंदू संगठनों ने जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया और कहा —
“योगी जी माँ का दर्द समझते हैं, वे इन निर्दोष बच्चों का बदला ज़रूर लेंगे।”
⚫ हिंदू संगठनों की चेतावनी — “यह केवल अपराध नहीं, आस्था पर प्रहार है”
मौके पर पहुंचे हिंदू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष गौसेवक अयुष त्यागी ककड़ा और उनकी टीम ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह केवल कानून व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि समाज में भय और असंतोष फैलाने की जिहादी मानसिकता का परिणाम है।
*“ऐसे अपराधियों पर उदाहरणात्मक दंड जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार की अमानवीय हरकत करने की हिम्मत न करे।”* — अयुष त्यागी ककड़ा
हिंदू संगठनों ने प्रशासन से मांग की कि दोषियों पर न केवल कठोरतम दंड दिया जाए, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्क गश्त और विशेष निगरानी दल गठित किए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि “ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ तुरंत एनकाउंटर जैसी कार्रवाई की जानी चाहिए — यही जनता की अपेक्षा योगी सरकार से है।
⚫ प्रशासन पर उठे सवाल — “केवल आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए”
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने अब तक केवल आश्वासन दिए हैं, जबकि क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार नहीं किया गया, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
*“हम न्याय चाहते हैं, बदले की भावना नहीं — लेकिन गोकशी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”* — ग्रामीणों का एक स्वर
⚫ “उपकार” की धरती पर रक्तरंजित दृश्य — संस्कृति पर गहरी चोट
गौरतलब है कि प्रसिद्ध अभिनेता मनोज कुमार की देशभक्ति फ़िल्म “उपकार” का अमर गीत “मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती…” इसी जलालाबाद गांव की पवित्र धरती पर फिल्माया गया था।

आज उसी धरती पर गन्ने के खेतों में गौमाता के अवशेष और खून से लथपथ दृश्य ने हर संवेदनशील नागरिक का सिर शर्म से झुका दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि ने कभी “जय जवान, जय किसान” का संदेश दिया था, उस पवित्र खेत में आज यह दृश्य राष्ट्र की आत्मा पर गहरी चोट जैसा है।
*“यह धरती कभी भारत की गौरवगाथा गाती थी, आज यही खेत रक्त से लाल हैं — यह हर भारतीय के लिए आत्ममंथन का क्षण है।”* — ग्रामीण
⚫ स्थानीय निवासियों का आक्रोश — “आस्था का अपमान और मीडिया की चुप्पी”
स्थानीय निवासी अमरपाल आर्य और कई ग्रामीणों ने बताया कि यह घटना सिर्फ़ गौकशी नहीं, बल्कि सनातन आस्था पर सुनियोजित प्रहार है।
*“जब इसी गांव में छोटी गंगा नहर के घाट पर किसी पुजारी की कोई विवादित वीडियो बनती है, तो बीबीसी जैसी अंतरराष्ट्रीय मीडिया उसे तुरंत कवरेज देती है। लेकिन जब हमारे खेतों में 10 गौमाताओं के कटे सिर मिले, तब वही मीडिया चुप क्यों है?”* — अमरपाल आर्य
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि घटनास्थल से मिले अवशेषों को प्रशासन ने जल्दबाज़ी में गांव के खेतों में दबा दिया, जिससे आक्रोश और गहरा गया है। उनका कहना है कि यह न केवल हिंदू आस्था पर हमला है, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता का खुला प्रमाण भी है।
⚫ भारतीय संस्कृति पर आघात
*“गौमाता केवल पशु नहीं, भारतीय संस्कृति और संवेदना की आत्मा हैं।”*
यह भावना घटनास्थल पर मौजूद हर ग्रामीण की आंखों में झलक रही थी।
इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि समाज में पनप रही कट्टर प्रवृत्तियों और चयनात्मक मीडिया नैरेटिव की भी पोल खोल दी है।
लेखक : रविंद्र आर्य
(राष्ट्रवादी दृष्टिकोण का सशक्त मंच)




