ग्वालियर में सुरेश नगर ठाठीपुर स्थित श्री सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा में आज पांचवें दिन श्री गिरिराज पूजन हुआ।मथुरा से पधारे युवा कथावाचक पंडित शुभम अग्निहोत्री श्री मद्भागवत कथा की अमृत वर्षा कर रहे हैं। आज की कथा में पूतना प्रसंग, शकटासुर, व्योमासुर,अघासुर आदि प्रसंग सुनाते हुए गौ चारण लीला का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि गौमाता का संवर्धन और संरक्षण के लिए ही श्री कृष्ण भगवान स्वयं गौमाताओं को चराने के लिए ही भाण्डीर वन बहुला वन आदि वनों में जाते थे और इसी कारण उनका एक नाम गोपाल पड़ा। परन्तु आजकल गौमाताओं की बड़ी दुर्दशा है।लोग सुबह शाम दूध निकाल लेने के बाद गौमाताओं को सड़कों पर घूमने और डंडा खाने के लिए छोड़ देते हैं ।जो गौमाता दूध देना बंद कर देती हैं उनको तो हमेशा के लिए छोड़ देते हैं कितनी विडंबना है कि ऐसी गौमाताओं को कूड़े कचड़े में अपना भोजन ढूंढना पड़ता है।हम देखते हैं कि लोगों के घरों में बड़े बड़े महंगें महंगे कुत्ते हैं।जब कुत्तों को पाल सकते हो तो गाय को क्यों नहीं? कुत्तों को पालना एक स्टेट्स सा हो गया है। कुत्ते भी दो तरह के होते हैं एक तो पालतू होते हैं और दूसरे फालतू होते हैं। गलियों और सड़कों पर घूमने वाले कुत्ते फालतू होते हैं जिनको नगर निगम के लोग पकड़ ले जाते हैं।चलो हम मान लेते हैं कि आप कोठी में कुत्ते को पाल नहीं सकते हो तो जितना खर्चा आप अपने पालतू कुत्ते पर करते हो उसका आधा खर्चा ही गौमाता के लिए निकाल दिया करो जिससे गौमाता की सेवा हो जाए। गौमाताओं में सभी देवताओं का निवास होता है और इस तरह आपको सभी देवताओं का आशीर्वाद मिल जाएगा। इसके बाद गोवर्धन की पूजा हुई और अन्त में सभी भक्तों ने भागवत भगवान् की आरती उतारी।
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