शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की गई।
रजरप्पा (रामगढ़)सिद्धपीठ रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर प्रक्षेत्र में हर ओर वैदिक मंत्रों की गुंज है। यह स्थिति आने वाले आठ दिनों तक बनी रहेगी। मंदिर प्रक्षेत्र के हर कुंडों में या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शाब्दिता.., नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः जैसे मंत्रों की गुंज है। साधकों ने पहला दिन माता शैलपुत्री का आह्वान किया। स्थानीय पूजारी लोकेश पंडा एवं छोटू पंडा के अनुसार, सिद्धपीठ स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर प्रक्षेत्र जागृत पीठ माना जाता है। जिसके कारण झारखंड सहित बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ सहित आसपास के अन्य राज्यों से साधक यहां पहुंचकर साधना करते हैं।

–पूजा पंडालों का निर्माण अंतिम चरण में
शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही कोयलांचल सहित आसपास के क्षेत्रों में भी भक्ति का बयार रही है। कई घरों में भी कलश की स्थापना की गई है। पहले दिन से ही लोग पूरी तरह से माता की शक्ति की भक्ति में लीन हो गए है। पूजा पंडालों में भी तैयारी जोर शोर से चल रही है। कारीगर निर्धारित समय पर पंडाल तैयार कर देंगे। बोरिया आश्रम और गिरि बाबा आश्रम में भी कलश स्थापना किया गया है। गिरि आश्रम आश्रमाचार्य रामशरण गिरि के अनुसार, आश्रम में नौ कलश स्थापना कर हर दिन देवी का आह्वान जा रहा है। नवरात्र के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा हुई ,जबकि शनिवार को नवरात्र के तीसरे दिन मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। इसी प्रकार चौथे दिन रविवार को माता के चौथे रुप माता कुष्मांडा की पूजा होगी।
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