google-site-verification: google2b21991adbe5cec3.html

टीबी उन्मूलन की दिशा में ऐतिहासिक कदम: जिले के 7 पंचायत घोषित ‘टीबी मुक्त’

– विश्व टीबी दिवस पर जिला पदाधिकारी ने किया सम्मान, 100 दिवसीय विशेष अभियान का शुभारंभ

– सुदृढ़ जांच, नि:शुल्क इलाज और जनभागीदारी से मिली बड़ी सफलता

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में जागरूकता और सामूहिक प्रयास का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। विश्व टीबी दिवस के अवसर पर किशनगंज जिले ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए सात पंचायतों को ‘टीबी मुक्त पंचायत’ घोषित किया है। यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह दर्शाती है कि सुनियोजित प्रयास और सामुदायिक सहभागिता से गंभीर बीमारियों पर भी प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।


इस अवसर पर जिला यक्ष्मा केंद्र, किशनगंज में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जिला पदाधिकारी श्री विशाल राज, कोचाधामन विधायक श्री सरवर आलम, जिला परिषद अध्यक्ष, रेड क्रॉस सोसाइटी के प्रतिनिधि आभाष कुमार साहा सहित कई वरीय अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के तहत 100 दिवसीय विशेष अभियान (100 डेज कैंपेन) का शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के लाइव प्रसारण के माध्यम से किया गया।


जिला यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य अगले 100 दिनों में अधिक से अधिक संभावित टीबी मरीजों की पहचान, उनकी जांच और उपचार सुनिश्चित करना है। इसके लिए घर-घर स्क्रीनिंग, सघन जांच और व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।


7 पंचायतों को मिला ‘टीबी मुक्त’ का दर्जा
कार्यक्रम के दौरान जिले के सात पंचायतों—पोठिया प्रखंड के कोलथा, ठाकुरगंज प्रखंड के पटेशरी एवं तातपौवा, दिघलबैंक प्रखंड के धनगरा, कोचाधामन प्रखंड के डेरामारी, टेढ़ागाछ प्रखंड के बेगना तथा किशनगंज प्रखंड के हालामाला—को ‘टीबी मुक्त पंचायत’ घोषित किया गया। इन पंचायतों में पिछले एक वर्ष के दौरान टीबी के नए मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है तथा सभी चिन्हित मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार पूरा कराया गया है।


जनभागीदारी से मिली सफलता
जिला पदाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग, जनप्रतिनिधियों और आम जनता के संयुक्त प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि “टीबी पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है। समय पर जांच और उपचार से इसे पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार या वजन में कमी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।”


सुदृढ़ स्वास्थ्य व्यवस्था और रणनीति
जिले में टीबी उन्मूलन के लिए बहुस्तरीय रणनीति अपनाई गई है। आशा कार्यकर्ता, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा घर-घर जाकर संभावित मरीजों की पहचान की जा रही है। संदिग्ध मरीजों की तत्काल जांच कर उन्हें नि:शुल्क दवा उपलब्ध कराई जा रही है तथा नियमित फॉलो-अप से उपचार पूरा कराना सुनिश्चित किया जा रहा है।


निक्षय योजना से मिल रही पोषण सहायता
टीबी मरीजों को ‘निक्षय योजना’ के तहत प्रति माह 1000 रुपये की पोषण सहायता सीधे उनके बैंक खाते में दी जा रही है। इसके साथ ही जिले में टीबी की जांच और उपचार पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बड़ी राहत मिल रही है।


आधुनिक तकनीक का उपयोग
जिले में 7 ट्रू-नैट मशीन एवं 1 सीबीएनएएटी मशीन के माध्यम से त्वरित जांच की जा रही है। इसके अलावा, सदर अस्पताल में 3 अल्ट्रा पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की सुविधा शुरू की गई है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में भी मरीजों की शीघ्र पहचान संभव हो रही है।


उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों का सम्मान
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि टीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया। इनमें विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के बीएचएम, लैब टेक्नीशियन और अन्य कर्मी शामिल हैं, जिनकी मेहनत से यह सफलता संभव हो पाई है।


टीबी मुक्त समाज की ओर बढ़ता किशनगंज
कोचाधामन विधायक श्री सरवर आलम ने कहा कि यह उपलब्धि जिले के लिए प्रेरणादायक है और आने वाले समय में सभी पंचायतों को ‘टीबी मुक्त’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि जनभागीदारी और सरकारी प्रयासों के संयुक्त बल से “टीबी मुक्त भारत” का सपना अवश्य साकार होगा।


Discover more from समाज जागरण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

🛍️ Today’s Best Deals

(Advertisement)