समाज जागरण अनिल कुमार
हरहुआ वाराणसी।
हरहुआ क्षेत्र अंतर्गत गोंड समुदाय के पैतृक भूमि में स्थापित “बुढ़ादेव आदिवासी पेनठाना स्थल ग्राम सभईपुर, (गोंड बस्ती) पो-धमहापुर, वाराणसी में “आदिवासी समुदाय सभ्यता संस्कृति का अस्तित्व-संरक्षण: वर्तमान समस्या एवं समाधान’ विषयक संगोष्ठी एवं प्रकृति शक्ति बढ़ादेव जी का सुमिरन गोगो का आयोजन किया गया।
आयोजन के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय भूमका/कार्यवाह अध्यक्ष-भूमका संघ, तिरूमाल गेंदा शाह उईके, विशिष्ठ अतिथि जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान, वाराणसी के उपाध्यक्ष तिरूमाल बुधिराम मरावी, अतिथि तिरुमाल बालाशाह उईके महासचिव, भूमका संघ मध्य प्रदेश, तिरूमाल कोमल शाह धुर्वे प्रदेश उपाध्यक्ष, भूमका संघ, सीक्नी, मध्यप्रदेश, तिरुमाल सुक्खू सिंह मरावी-भूमक संघ प्रदेश सचिव उ०प्र द्वारा प्रकृति शक्ति बढ़ादेव जी का सुभिरन गोंगो (पूजन) कर किया गया।
मुख्य अतिथि गेंदा शाह उईके, ने अपने सम्बोधन में कहा कि जनजाति समाज के भावी पीढ़ी के युवाओं को अपना मेग दस्तूर, रीति-नीति, संस्कृति आदि विषयों पर वर्तमान में गहन चर्चा एवं विमर्श की आवश्यकता है। जिससे आदिवासी गोडी रीति-रिवाज संस्कृति को मजबूती प्रदान मिल सके। जिसके लिए हम आदिवासी भाईयों को अनेक कुरितियों नशाखोरी, अशिक्षा, अज्ञांनता आदि से दूर रह कर अपने परिवार एवं समाज को बचायें रखने का बहुत जरूरत है। साथ ही शासन प्रशासन की अनेक योजनाओं कार्यक्रमों तथा सरकारी रिपोर्ट में अपना अभिलेख सही कराये जाने की अति आवश्यता है जिससे भावी पीढ़ी को होने बाली समस्याओं से बचाया जा सके। जनजाति समाज को शिक्षा, स्वास्थ एवं रोजगार आदि पर निरंतर ध्यान देने की जरूरत है। जो आदिवासी समाज को मुख्य धारा में लाने का कार्य करती है।
जनजातीय शोध एवं विकास संस्थान के उपाध्यक्ष तिरूमाल बुधिराम मरावी ने कहा कि गोंड आदिवासी समाज को खासकर ग्राम सभईपुर के गोंड आदिवासी जनजाति समुदाय के खसरा संख्या-132 एवं 136क, ख मूल खतियान/भूमिधर के वशंजों (मरावी गोत्र वंशी) ने गोंडी रीति-रिवाज का पालन करते हुए अपनी इतिहास, धरोहर, संस्कृति, पेन पुरखा, देव, गोत्र, टोटम की रक्षा एवं संरक्षण के लिए आगे आना होगा और अपनी भूमि को लालच तथा प्रलोभन से दूर रहकर संरक्षण करना होगा।
इस अवसर पर विनोद, सुशील गोंड, मनकेशरा देवी, सम्पूर्णा देवी, कमलेश कुमार, राजेश कुमार, शिवकुमार, राकेश मरावी, संतोष सिंह मरकार तथा सभईपुर के गोंड जनजाति मरावी गॉत्र परिवार के सैकड़ो महिला पुरुष एवं अठागांवा / अठ्ठारह महाल एवं रिश्तेदार नातेदार तथा गैर स्वजातीय समाज के वरिष्ठ जन उपस्थित रहे।