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अनुमंडल पदाधिकारी छतरपुर द्वारा बस के यात्रियों को उतार कर जप्त करना दुर्भाग्यपूर्ण:चंदन प्रकाश सिन्हा

समाज जागरण दीपक सरकार

छतरपुर: अनुमंडल पदाधिकारी छतरपुर द्वारा बस के यात्रियों को उतार कर जप्त करना दुर्भाग्यपूर्ण गैरजिम्मेदाराना और अनैतिक है। इसके लिए सरकार को लिखा जाएगा और यदि आवश्यकता पड़ी तो आंदोलन भी किया जाएगा। उक्त बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय समिति सदस्य सह जिला प्रवक्ता चन्दन प्रकाश सिन्हा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा।जारी किए गए प्रेस विज्ञप्ति में चंदन प्रकाश सिन्हा ने कहा कि सर्वप्रथम अनुमंडल पदाधिकारी को सरकार ने जिस काम के लिए भेजा है उन्हें उस काम को करना चाहिए।समान्यत: ऐसा देखा गया है कि सड़कें सुनसान हो फिर भी अनुमंडल प्राधिकारी का गाड़ी सायरन बजाते हुए सड़कों से ऐसे गुजरता है मानो किसी मंत्री या वीवीआईपी का काफिला हो।जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें अपने शक्ति का प्रदर्शन के शौक के साथ ही आम जनों में अपने पद का खौफ पैदा करने का शौक हो। उनके द्वारा जीस रुट की गाड़ी को जप्त किया गया उस रूट से भारत के प्रमुख अस्पताल वेल्लौर एवं चेन्नई के गंभीर रूप से ग्रसीत मरीजों का आना जाना लगा रहता है।किसी मरीज को कुछ हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती?यह काम विपक्ष को सरकार के खिलाफ बोलने के अवसर प्रदान करने जैसा हो जाता है। इन्हें हमेशा याद रखना चाहिए कि सरकार के द्वारा उन्हें दी गई शक्ति अपने सुख सुविधा नहीं बल्कि आम जनों के लिए दी गई है।अखबार में समाचार पत्रों में आए दिन छतरपुर में जाम की स्थिति से संबंधित समाचार प्रकाशित किए जाते हैं यहां तक कि घंटों एम्बुलेंस के फंसे होने सम्बन्धी न्यूज भी प्रकाशित की गई है जिस पर अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा कोई कदम नहीं उठाया गया और जब इस जाम में खुद फंसे तो यात्रियों को बस उतारकर बस को जप्त कर लिया गया जो बहुत ही निंदनीय और गैरजिम्मेदाराना हैं।यदि बस ड्राइवर के द्वारा कोई गलती की गई थी तो बस को जप्त करने के बजाय नियमानुसार बस मालिक को फाइन किया जाना चाहिए था और छतरपुर के ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त किया जाना चाहिए ताकि यातायात व्यवस्था स्मूथ बनाया जा सके। वर्षों पहले बस स्टैंड के लिए जमीन चिह्नित किया जा चुका है लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।अनुमंडल पदाधिकारी को सरकार द्वारा स्वयं के जाम से निकलने के लिए सायरन नहीं दिया गया है बल्कि आम लोगों को इसका लाभ हो इसके लिए उन्हें शक्तियां प्रदान की गई है। अनुमंडल पदाधिकारी खुद एक आईएएस है और यूपीएससी के चार विषय में एक विषय नैतिकता का होता है शायद वह भूल गए हैं और इस घटना में नैतिकता को पूरी तरह से ताक रखकर कार्य किया गया है। छतरपुर में विभिन्न तरह के समाजिक कार्यक्रमों के आयोजन में भी अनुमंडल पदाधिकारी की उपस्थिति शून्य दिखाई देती है जिसके कारण सरकार एवं आम जनों के बीच का संवाद नहीं होने के कारण विकास कार्य बाधित हो रहा है।सरकार को इन्हें छतरपुर अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में यहां से हटाने एवं आने वाले समय में किसी भी जिम्मेवार पद पर नहीं रखने के लिए लिखा जाएगा। साथ ही यूपीएससी को भी लिखा जाएगा।


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