वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
किशनगंज की बेटी जूही दास ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने हौसले और मेहनत से सफलता की नई मिसाल कायम की है। शहर के खगड़ा (प्रेम पुल) निवासी जूही दास ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 649वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी बन गई है।
दुखों के बीच भी नहीं टूटा हौसला
जानकारी के अनुसार, जूही के साक्षात्कार से ठीक पहले 13 फरवरी को उनके पिता स्व. निवारण दास का बीमारी के कारण निधन हो गया था। सामाजिक परंपराओं को पीछे छोड़ते हुए जूही ने ही अपने पिता को मुखाग्नि दी। पिता के निधन के गम के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मात्र 11 दिन बाद, 24 फरवरी को यूपीएससी का इंटरव्यू दिया। अंततः उन्होंने परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अपने दिवंगत पिता के सपने को साकार किया।
शिक्षा का सफर
जूही दास की प्रारंभिक शिक्षा किशनगंज में ही हुई। उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां इस प्रकार हैं—
मैट्रिक (2015): बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल, 9.4 सीजीपीए
इंटर (2017): चैतन्य कॉलेज, विशाखापट्टनम, 92 प्रतिशत
उच्च शिक्षा: कोलकाता से बीटेक (B.Tech) की डिग्री
मां के अधूरे सपने को बनाया लक्ष्य
जूही की इस सफलता में उनकी मां अन्निका दास (न्यायमित्र) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अन्निका दास स्वयं भी कभी यूपीएससी की अभ्यर्थी रही थीं, लेकिन सफल नहीं हो सकीं। जूही ने अपनी मां के उसी अधूरे सपने को अपना लक्ष्य बनाया। बिना किसी कोचिंग संस्थान के, घर पर ऑनलाइन नोट्स और स्वाध्याय के माध्यम से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। इस दौरान उन्हें सपन कुमार दास और सुशोभन दास से मार्गदर्शन भी मिला।
IPS या IRS मिलने की संभावना
यह जूही का चौथा प्रयास था। इससे पहले वह दो बार इंटरव्यू तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन अंतिम सूची में स्थान नहीं मिल पाया था। 649वीं रैंक के आधार पर उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) या भारतीय राजस्व सेवा (IRS) मिलने की संभावना है।
जूही के पिता घर के पास मोटर पार्ट्स की दुकान चलाते थे। बेटी की इस सफलता से पूरा परिवार और क्षेत्र गौरवान्वित महसूस कर रहा है।



