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व्रत में कुट्टू का आटा खा रहे हैं तो रहें सावधान, ताजगी से लेकर पकाने तक इन बातों का रखें ध्यान

पुराना या खराब कुट्टू का आटा बन सकता है परेशानी की वजह, दही-रायता और फलों के साथ ले सकते हैं; एलर्जी के लक्षण दिखें तो तुरंत रहें सतर्क

नई दिल्ली। व्रत और त्योहारों के मौसम में कुट्टू के आटे की मांग बढ़ जाती है। कुट्टू की पूरी, रोटी, परांठा, चीला और पकौड़ी व्रत के दौरान लोगों की पसंद में शामिल रहती हैं। इसे फलाहार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कुट्टू के आटे को लेकर थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए परेशानी पैदा कर सकती है। आटे की ताजगी, भंडारण, पकाने और मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है।

कुट्टू का आटा सामान्य गेहूं या दूसरे अनाज के आटे की तरह लंबे समय तक रखने के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। इसमें प्राकृतिक तेल की मात्रा होने के कारण यह समय के साथ खराब हो सकता है। इसलिए बाजार से कुट्टू का आटा खरीदते समय पैकेट पर निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम तिथि जरूर जांचनी चाहिए। खुले में बिक रहे आटे की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है।

रंग और गंध में बदलाव दिखे तो न करें इस्तेमाल

कुट्टू का आटा खरीदने या इस्तेमाल करने से पहले उसकी स्थिति जरूर जांचें। यदि आटे में असामान्य रंग परिवर्तन दिखाई दे, उसमें नमी या गांठें बन गई हों अथवा सीलन और फफूंद जैसी गंध आ रही हो तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। खराब खाद्य पदार्थ खाने से पेट संबंधी परेशानी हो सकती है।

घर में आटा रखने के लिए एयरटाइट डिब्बे का इस्तेमाल करें। इसे नमी, गर्मी और सीधी धूप से दूर रखें। यदि आटे को कुछ समय के लिए रखना है तो ठंडी जगह पर रखें और लंबे समय तक भंडारण की स्थिति में फ्रिज का विकल्प अपनाया जा सकता है।

कुट्टू की पूरी और पकौड़ी खूब तलकर नहीं, समझदारी से खाएं

व्रत के दौरान कुट्टू की पूरी और पकौड़ी सबसे ज्यादा खाई जाती हैं। हालांकि अधिक तेल में तली चीजों का सेवन करने से भारीपन, एसिडिटी और पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। इसलिए कुट्टू की रोटी, चीला या कम तेल में तैयार व्यंजन अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

कुट्टू के आटे से कोई भी व्यंजन बनाते समय उसे अच्छी तरह पकाना चाहिए। अधपका भोजन कुछ लोगों के लिए पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है।

दही, छाछ और रायते के साथ ले सकते हैं

कुट्टू से बने भोजन के साथ दही या छाछ लिया जा सकता है। खीरे या लौकी का रायता भी व्रत के भोजन में शामिल किया जा सकता है। इससे भोजन में विविधता आती है और दही से प्रोटीन एवं कैल्शियम जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं।

उबले आलू की हल्की सब्जी के साथ कुट्टू की रोटी या पूरी भी खाई जाती है। हालांकि आलू और तली हुई पूरी दोनों की मात्रा अधिक रखने से भोजन काफी भारी हो सकता है, इसलिए संतुलित मात्रा में सेवन करना बेहतर है।

फलों को भी करें भोजन में शामिल

कुट्टू के साथ सेब, पपीता, केला जैसे फल लिए जा सकते हैं। फल शरीर को फाइबर, विटामिन और अन्य पोषक तत्व देते हैं। व्रत के दौरान केवल तली हुई चीजों पर निर्भर रहने की बजाय फल, दही और अन्य पौष्टिक विकल्पों को भोजन में शामिल करना बेहतर रहता है।

कुछ लोग कुट्टू के आटे में सिंघाड़े का आटा मिलाकर भी रोटी या चीला तैयार करते हैं। इससे स्वाद में बदलाव आता है और भोजन में अलग-अलग खाद्य पदार्थ शामिल हो जाते हैं।

पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी

व्रत में कई लोग सामान्य भोजन और पानी दोनों की मात्रा कम कर देते हैं। इससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। यदि व्रत में पानी पीने की अनुमति है तो पर्याप्त मात्रा में पानी लेते रहें। जरूरत के अनुसार छाछ या नारियल पानी जैसे तरल पदार्थ भी लिए जा सकते हैं।

सेंधा नमक का इस्तेमाल करते समय भी रखें संतुलन

व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि सेंधा नमक भी नमक ही है और इसका अधिक सेवन उचित नहीं है। इसी तरह देसी घी को भी सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए। किसी एक खाद्य पदार्थ को स्वास्थ्य के लिए चमत्कारी मानकर जरूरत से ज्यादा खाना उचित नहीं है।

कुट्टू से एलर्जी वालों को विशेष सावधानी

कुछ लोगों को कुट्टू से एलर्जी हो सकती है। इसके सेवन के बाद त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली, होंठ या चेहरे पर सूजन, उल्टी अथवा सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण सामने आने पर कुट्टू का सेवन रोक देना चाहिए। सांस लेने में परेशानी या तेज एलर्जी की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

व्रत में संतुलित भोजन है सबसे जरूरी

कुट्टू का आटा व्रत के दौरान भोजन का एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे जरूरत से ज्यादा खाने की आवश्यकता नहीं है। तली हुई पूरी और पकौड़ी की जगह कम तेल में बने व्यंजन, दही-रायता, फल और पर्याप्त तरल पदार्थ भोजन को अधिक संतुलित बना सकते हैं। खासकर मधुमेह, किडनी, हृदय या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को व्रत के भोजन में बदलाव करने से पहले चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

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