भूमि मापी बनी ‘उगाही का जरिया’: दस हजार रिश्वत नहीं देने पर अमीन का इनकार, निजी व्यक्ति के जरिए वसूली के आरोप

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
27 अप्रैल 2026।
किशनगंज प्रखंड के मोतीबाग वार्ड संख्या 7 से भूमि मापी के नाम पर कथित रिश्वतखोरी और गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी प्रक्रिया अब कुछ कर्मियों के लिए “उगाही का जरिया” बनती जा रही है।
पीड़ित के अनुसार, मौजा सुंदराणन, खाता संख्या 21, खेसरा संख्या 1/3 की भूमि के खेसरावार रकवा सुधार (परिमार्जन) के लिए करीब दो माह पूर्व आवेदन किया गया था।

राजस्व कर्मचारी के निर्देश पर सरकारी अमीन के माध्यम से मापी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया गया तथा निर्धारित दो हजार रुपए शुल्क जमा किया गया। मापी की तिथि 11 अप्रैल तय की गई थी।
आरोप है कि निर्धारित तिथि पर अंचल अमीन अवधेश कुमार एक निजी व्यक्ति के साथ स्थल पर पहुंचे। मापी शुरू करने के बजाय उन्होंने कथित तौर पर दस हजार रुपए की अवैध राशि की मांग की। पीड़ित का कहना है कि अमीन उक्त निजी व्यक्ति को वसूली के लिए साथ रखते हैं और पूरे मामले में उसकी भूमिका संदिग्ध रही है।


पीड़ित का आरोप है कि अतिरिक्त राशि देने से इनकार करने पर अमीन ने मापी करने से साफ इनकार कर दिया और कथित तौर पर धमकी दी, “तुम्हारी जमीन की मापी नहीं होगी, जो करना है कर लो।” इसके बाद भूमि मापी पोर्टल पर यह रिपोर्ट दर्ज कर दी गई कि “चौहद्दी नहीं मिल रही है।”


स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है। किशनगंज में पूर्व में भी कई राजस्व कर्मियों पर रिश्वत लेने के आरोप में निगरानी विभाग द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है, इसके बावजूद भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है। आरोप है कि कुछ कर्मियों द्वारा संगठित तरीके से उगाही की जा रही है, जिसमें पैसे देने वालों के कार्य प्राथमिकता से निपटाए जाते हैं, जबकि अन्य मामलों को जानबूझकर लंबित रखा जाता है।


पीड़ित ने यह भी सवाल उठाया है कि लगभग 70 वर्ष पुराने चौहद्दी का वर्तमान स्थिति से भिन्न होना स्वाभाविक है। ऐसे में बिना ठोस जांच के “चौहद्दी नहीं मिल रही” जैसी रिपोर्ट देना न केवल लापरवाही, बल्कि पूरे प्रकरण को संदिग्ध बनाता है।
इस संबंध में अंचल अधिकारी गंगाराम टुडू ने कहा कि समय के साथ चौहद्दी में परिवर्तन संभव है तथा अमीन को मापी करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, निर्देश के बावजूद अब तक मापी नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


यह मामला स्थानीय प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। पीड़ित ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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