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‘हर घर में दीया जले’ हम सबकी जिम्मेदारी है। समाज जागरण, “एक पहल एक प्रयास”

समाज जागरण

हमारे देश पर्व त्योहारों का देश है। अपने सांस्कृति धरोहर को संजो कर रखने में पर्व त्योंहारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हम सभ मिलकर इसे आगे बढ़ाते चले यह जिम्मेदारी हम सबकी है। कुछ दिन पहले ही दशहरा संपन्न हुए है और अब दीवाली का महापर्व है जो कि लगभग पूरे दुनिया में मनाये जाते है।

दीवाली के मौके पर समाज जागरण के टीम लगातार बाजार पर नजर बनाए हुए है।

बाजार के में दुकान बड़े जोड़ो शोरों से सजी हुई है ग्राहक का इंतजार है। कुछ दुकानों में ग्राहक पहुँच भी रहे है लेकिन कुछ दुकान अभी भी ग्राहकों के इंतजार में है। ऐसे ही एक दुकान में समाज जागरण के टीम पहुँची और दुकानदार से पता किया की आखिर कारण क्या है, तो कहने लगे आनलाइन के जमाना है। लोग अमेजन और दुसरे साइट से जाकर खरीद रहे है। समाज जागरण नें उनसे सवाल किया क्या आपने भी कभी मंगाया है। बड़े झेपते हुए बोले दुकानदार ‘ अभी गर्मी में कुलर मंगवाया था’ और कुछ दिन पहले ही एक वीवो का मोबाइल खरीदा।

टीम ने दुसरा सवाल किया क्या आपके इस मार्केट में मोबाइल की दुकान नही है ? दुकानदार नें कहा अमेजन से थोड़ा सा सस्ता मिल जाता है और कार्ड पर कैश बैक भी इसलिए मंगा लेते है। ऐसे ज्यादातर समान तो मार्केट से ही खरीदते है।

टीम नें दुकानदार बंधु से कहा जब आप आनलाइन शापिंग करते है तो फिर आपके पड़ोसी दुकानदार मोबाइल वालों नें भी आनलाइन शापिंग की होगी। उसको भी कैश बैक और डिस्काउण्ट मिला होगा। क्या आपको नही लगता है कि ऐसे ही करते करते आपकी ये दुकान बंद हो जायेंगे ? क्या कोरोना काल में अमेजन वाले आपके साथ खड़ा था या पिर गुगल वाले ? हमारे पड़ोसी दुकानदारों नें महीनों भर जैसे तैसे करके राशन दिया था, लंगर बांटे थे।

ये ही सवाल हम आप सभी से भी कर रहा हूँ ? क्या आप चाहते है कि पड़ोसी के दुकान बंद हो जाये ? शायद उसी के पड़ोस में आपका दुकान भी होगा ?

हम सबका का जिम्मेदारी है कि सबके घर में दीया जले, तो झोला उठाइये और अपने नजदीक के बाजार जाइये मिलिए अपने चाचा, ताउ, भइया , मामा, भतीजा से। देखिये क्या क्या समान बेच रहे है जो आप खरीदना चाहते है। जाइये बाजार में मिट्टी के दिये वाली आपके इंतजार में है। आप उनसे दीये खरीदेंगे को वो भी किसी से खाने की समान खरीदेंगी जो कही न कही आपके किसी अपने के दुकान है जिसका लाभ आपको भी होना है। हम सब एक दूसरे के पूरक है।

आपकी गलतफहमी के कारण विदेशी कंपनिया बिना हिंग और फिटकरी के हजारों करोड़ के नुकसान कर जाती है। आप दुकानदार से खरीदेंगे तो दुकानदार किराये देगा दुकानों की। समान मंगवायेगा, तो गाड़ी वालों का रोजगार, जिस कंपनी का सामान है उस कंपनी को रोजगार जिसमें सैकड़ो और हजारों के तादाद में लोग काम करते है। जब सामान बिकेगा, तभी कंपनी चलेगा और तभी जाकर वेतन मिलेंगे और फिर दुकान पर खरीदारी होगा।

हमारे द्वारा किए गए थोड़ा सा प्रयास ही कई घरों में दीये जलाने में सहायक हो सकते है।


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