वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
शराब तस्करों ने कानून को ठेंगा दिखाते हुए इस बार मानव सेवा के प्रतीक एंबुलेंस का ही इस्तेमाल तस्करी के लिए कर डाला। उत्पाद विभाग की सतर्कता से 10.5 लीटर विदेशी शराब बरामद की गई और दो तस्करों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। गुप्त सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में जब एंबुलेंस की तलाशी ली गई, तो अंदर से शराब की बोतलें छिपाकर रखी मिलीं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि राज्य में लागू शराबबंदी कानून के बावजूद अवैध शराब का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। वर्ष 2016 में सख्ती के साथ लागू की गई शराबबंदी के बाद सरकार ने दावा किया था कि प्रदेश में पूर्ण नियंत्रण होगा, लेकिन हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। तस्कर नए-नए हथकंडे अपनाकर प्रशासन को खुली चुनौती दे रहे हैं।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवा का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ भी खिलवाड़ है। सवाल उठता है कि जब तस्कर खुलेआम एंबुलेंस तक का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो निगरानी तंत्र आखिर कितना प्रभावी है?
उत्पाद विभाग ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। लेकिन जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि आखिर शराबबंदी कानून का भय क्यों समाप्त होता जा रहा है? क्या लगातार हो रही तस्करी की घटनाएं सरकार की नीति और उसके क्रियान्वयन पर सवाल खड़े नहीं करतीं?
प्रशासन चाहे जितने दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अवैध शराब का कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा। जरूरत है ठोस और प्रभावी कार्रवाई की, ताकि कानून का डर कायम हो और ऐसे कृत्यों पर पूरी तरह रोक लग सके।



