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गुमशुदा किशोरी मामले में बड़ी कार्रवाई, प्रभारी थानाध्यक्ष लाइन क्लोज, अनुसंधानकर्ता निलंबित

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
7 जून। गुमशुदा किशोरी मेनका कुमारी (13 वर्ष) के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में विलंब तथा अनुसंधान में लापरवाही बरतने के आरोप में पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत किशनगंज थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष को लाइन क्लोज कर दिया गया है, जबकि मामले के अनुसंधानकर्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।


पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश के अनुसार, किशनगंज थाना कांड संख्या 574/26, जो 13 वर्षीय किशोरी मेनका कुमारी की गुमशुदगी से संबंधित है, की समीक्षा के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच में पाया गया कि किशोरी के परिजन द्वारा आवेदन दिए जाने के बावजूद प्राथमिकी समय पर दर्ज नहीं की गई। आरोप है कि थाना स्तर पर आवेदन में बदलाव भी कराया गया।


मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1 को विस्तृत जांच का निर्देश दिया था। जांच प्रतिवेदन में पाया गया कि तत्कालीन प्रभारी थानाध्यक्ष, पुलिस निरीक्षक नेसार अहमद ने प्राथमिकी दर्ज करने में अनावश्यक विलंब किया, जो उनके कर्तव्य के विपरीत एवं घोर लापरवाही का परिचायक है। इसके आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन क्लोज करते हुए सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।


वहीं, मामले के अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक सुधीर कुशवाहा पर भी गंभीर आरोप सिद्ध पाए गए। जांच में सामने आया कि उन्होंने किशोरी की सकुशल बरामदगी के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए तथा परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया। इसके अलावा घटनास्थल से मिले महत्वपूर्ण साक्ष्यों को समय पर जब्त नहीं किया गया और अनुसंधान में केवल औपचारिकता निभाई गई। इन आरोपों के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है तथा सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।


उल्लेखनीय है कि 4 जून को किशनगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत रमजान नदी स्थित शिवगंगा छठ घाट के समीप किशोरी का शव बरामद हुआ था। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की गहन समीक्षा की थी।
किशनगंज पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कर्तव्य निर्वहन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता, अनुशासनहीनता अथवा संदिग्ध आचरण के प्रति विभाग की ‘शून्य सहिष्णुता’ (Zero Tolerance) की नीति है। दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी के विरुद्ध आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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